गाडी करती चुक-चुक-चुक लम्बू कहता रुक-रुक-रुक...रेलगाड़ी कविता
ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अकलेश कुशवाह एक रेलगाड़ी कविता सुना रहे है:
गाडी करती चुक-चुक-चुक लम्बू कहता रुक-रुक-रुक-
डिब्बा कहता घुस-घुस लम्बू चढ़ गया चुप-चुप-चुप-
इंजन बोल पुक-पुक-पुक गाड़ी चल दी चुक-चुक-चुक-
आगे थी वह भैंस खड़ी गाडी से वह नहीं डरी...
