टीवी पर बचपन से देख रहा हूँ, ये खूनी खेल...श्रदांजलि कविता
ग्राम-पड़ेगाँव, ब्लाक-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से साहित्यकार डॉ.पी.एस.पुष्प देश के अमर शहीदों को श्रध्दांजलि अर्पित करते हुए एक कविता सुना रहे हैं :
टीवी पर बचपन से देख रहा हूँ, ये खूनी खेल-
आह नहीं पाता आती नहीं समझ, ये कैसी शहादत है-
छोटे-छोटे बच्चे हो गये हैं अनाथ, जहाँ पत्नी की उजड़ गई मांग-
बूढी माँ किवाड़ खोल दरवाजे पर, सिर पीट-पीट कर रो रही हैं-
ये कैसी शहादत है,ये कैसी शहादत है...
