बेरोजगारी की इस महा बीमारी में सभी तो रिश्ते तोड़ रहे हैं...कविता
ग्राम-फुक्काडीह, प्रखंड-जरहीडीह, जिला-बोकारो (झारखण्ड) से तीर्थनाथ आकाश विस्थापन एवं बेरोजगारी की समस्या के ऊपर आधारित एक रचना सुना रहे हैं:
बेरोजगारी की इस महा बीमारी में सभी तो रिश्ते तोड़ रहे हैं-
जिन्हें कहा करते थे हम अपना वो भी हम से मुह मोड़ रहे है-
जो जिंदगी लगा कर की थी हंसी, उसी जिंदगी से डर रहें है-
ये हम जानते है बेरोजगारी में जिंदगी जी रहें है या मर रहे है...
