घट-घट में जो रम रहा, कण-कण में करता वास...आध्यात्मिक गीत
राजेन्द्र गुप्ता ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़ से एक आध्यात्मिक गीत सुना रहे हैं :
घट-घट में जो रम रहा-
कण-कण में करता वास-
जिसके रमने से चले-
भीतर-बाहर स्वांस-
दृश्य वही द्रष्टा वही, नयनन करे प्रकाश-
जीव ब्रम्ह माया वही, धरती जल आकाश-
गुरु वही गुरुमुख वही, गुरुपद का विश्वास-
बिन उसके यह तन जरे, जैसे सूखे घास...
