ते हर जिनगी के हर स्वाद चखे हस...छत्तीसगढ़ी कविता
तमनार, जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़ से राजेंद्र गुप्ता छत्तीसगढ़ी में एक कविता प्रस्तुत कर रहे है:
ते हर जिनगी के हर स्वाद चखे हस-
मीठा अउ कडवा के स्वाद बने हस-
दिन-दुखिया के आस बने हस-
अरे रसना ते हस कमाल करे हर-
ते हर जिनगी केतंरग आस बने हस-
अतेक बढ़ जिनगी के ख़ाक बने हस-
ते हर देह करण धार बने हस-
अरे रसना ते तो कमाल कर हस-
तोर बर मिर्ची पताल बने हे-
गुड अउ मीठा फरहार बने हे-
नशा के हर स्वाद बने हस-
जेंला चखे हर भाग बने हे-
तेंदू,चार अउ महुआ रस के हर दार बने हे-
रंग-बिरंग के साग बने हे-
ते हर जिनगी के स्वाद बने हस-
मीठा अउ कडवा के स्वाद बने हस-
अरे रसना ते तो कमाल करे हस...
