दिखने की केवल खडिया हूं मैं
दिखने की केवल खडिया हूं मैं
काम में कितनी बढिया हूं मैं
मेरा तन कितना कोमल सुन्दर अति निर्मल है
पावन तन का द्योतक हूं मैं
दिखने की केवल खडिया हूं मैं
निकृष्ट तख्ते पर जब मैं चलती हिलती डुलती हूं
ज्ञान रस का घट भरकर बच्चों को पिलाती हूं
बूढों को मार्ग बताती हूं
मूर्खों के लिए खडिया हूं मैं
काम में कितनी बढिया हूं मैं
