गाँव को सुखी बनाओ साथी, गाँव को सुखी बनाओ...एक गीत
गाँव को सुखी बनाओ साथी, गाँव को सुखी बनाओ
ग्राम देवता ने फिर हम सबको ललकारा है,
गाँव हमारा सुखी बनेगा यही हमारा नारा है
अज्ञान, अनीति का अब हमने तोड़ निकाला है
घर घर में अब जल बहाने श्रम गंगा की धारा है
श्रम से जी ना चुराओ साथी , गाँव को सुखी बनाओ
खेतों में फसलों की रानी को अब हमको सजाना है
घर घर फिर दूध, दही, मक्खन की नदी बहाना है
फल उद्द्यान का तातां हमें लगाना है
सुविधा के अनुसार हमें फिर उद्योग चलाना है
अपना बल आजमाओ साथी, गाँव को सुखी बनाओ
सबके सुख में अपना सुख है यही मान कर चलना है
श्रम के पूंजी से ही साथी हमें तो आगे बढ़ाना है
पहले जैसे साथी भाई भाई बनके रहना है
