Trade Union of MGNREGA workers formed in Chhattisgarh
Rajim from Saraipali block in Chhattisgarh says they have formed a trade union of workers in MGNREGA. In the meeting to form the trade union many issues came up. One of them is that people who get old age pension they are getting denied from MGNREGA work and in many villages no work has been sanctioned under MGNREGA and people are migrating in search of work. Rajim speaks to one such laborer who says they want work but no work is starting in their village
Posted on: Feb 04, 2011. Tags: CHHATTISGARH RAJIM
Appeal to BBC to not close its Hindi radio broadcast
Surendra Hanspal interviews a BBC Hindi radio listener Jhavendra Dhruv who is appealing to BBC to not close down its Hindi broadcast. He says listeners like him rely on BBC Hindi to get in depth news and they are very sad with the decision to close down the service and hope that BBC will never close their Hindi broadcast
Posted on: Feb 04, 2011. Tags: Surendra Hanspal
दीवारों से विचारों पर जो अंकुश लग गया होता, तो बापू डर गया होता...
दीवारों से विचारों पर जो अंकुश लग गया होता
तो बापू डर गया होता
यदीबी ज़ुल्म के आगे हुसैनी जीत न होती
कृष्ण जन्म न लेता
विष्णु मर गया होता
फिरंगी सूर्य न ढलता
ये भारत वर्ष न होता
कभी भी सत्य की खातिर कोई संघर्ष न होता
जहां पर डॉक्टरों की एक झलक का नाम है पैसा
जहां पर ज़िन्दगी और मौत का संग्राम है पैसा
वहीं जाकर बिनायक ने दिलों में धडकनें बांटी
जगाया जीने का जज़्बा, जलाई प्रेम की बाती
खिलाए फूल से चेहरे बयांबा जंगलों जाकर
बसाई उजडी बस्ती भी उसी का घर बना बस्तर
गरीबों की खुशी को देखकर जलने लगे अफसर
हुआ चर्चा तो नेता भी वहां लगे आने अक्सर
अंधेरे में जले दीपक तो भूत भाग जाते हैं
बहाने ढूंडकर वरना जले दीपक बुझाते हैं
बिनायक जानता था हर किसी शैतान की साजिश
पुलिस की गुण्डागर्दी और गुण्डाराज़ की साजिश
कभी मज़बूर पर गोली कभी संहार की साजिश
कभी कुर्सी बचाने की वही सरकार की साजिश
हुए मासूम जो घायल तो रोया था बिनायक भी
न जाने कितनी रातों से न सोया था बिनायक भी
अदालत पर भरोसा करके खोले राज़ जो उसने
हिली कुर्सी हुआ हडकम्प फंसे उसमें विधायक भी
लगे निर्दोष पर पोटा और हत्यारा बने सीएम
है अपने देश की यह रीत अब तक इस तरह कायम
उसी ही श्रुंखला में नाम बिनायक का भी आता है
ज़ुल्म ढाए जाते हैं वो फिर भी मुस्कुराता है
चले जब ज़ुल्म की आंधी, न घबराओ, न डर जाओ
चलो मज़लूम की खातिर ज़रा परचम तो लहराओ
सलाखें मोम कर डालो, मसीहा है सलाखों में
सिखा दो प्यार की बोली सितम ढाते इलाकों में
