Live report from Anti liquor Yatra in Chhattisgarh

Kaladas Daharia is reporting live from Anti Liquor Yatra which started in Chhattisgarh on 2nd October. He says the Yatra which started from Raipur has covered Dhamtari, Mahasamund, Kanker and Bastar district and now have entered Durg. After that they will be going towards Kawardha. He says also in the tribal areas they are getting tremendous support from the people. The Yatra will culminate in a rally in Gandhi Maidan in Raipur on 31st October

Posted on: Oct 12, 2010. Tags: CHHATTISGARH KALADAS DAHARIA

मिली है एक ज़िंदगी रोकर मत गंवाओ

एक ज़िंदगी

मिली है एक ज़िंदगी रोकर मत गंवाओ
रोने में क्या रक्खा है खुशी से दिन बिताओ
जाने कब क्या हो जाए इसे ऐसे ही मत गंवाओ
एक एक पल को खुशियों से सजाओ
डरो कभी न एक क्षण को, निर्भय होकर दिन बिताओ
प्यार से बातें करो, कभी किसी पर मत गुस्साओ
आए कितनी भी मुश्किलें राह पर, हंसकर उनको पार करो
बने जी कांटे पथ पर, उनको जड से दूर करो
जिस आदत में है बुराई, कभी न उसके पास फटको
जो करे तुमसे नफरत, तुम उससे प्यार करो
हताशा में निराश न होकर, आशा का संचार करो
इस प्यारी सी ज़िन्दगी का हंसकर सत्कार करो

अर्चना

Posted on: Oct 11, 2010. Tags: Archana

मैं खामोश बस्तर हूं, लेकिन आज मैं बोल रहा हूं...

मैं आज़ादी के लिए गुण्डाधुर को जन्म दिया था
इन्द्रावती का पानी तो भगवान राम ने जिया था
भोले आदिवासी भाला और धनुष बाण चलाते थे
विदेशी हथियार तो उनकी समझ में नहीं आते थे
ये विकास की कैसी रेखा खिंच गई

मेरे साथी मैं ही लैंडमाइन बिछ गई
लाशों के टुकडे जोड रहा हूं
एक एक जख्म खोल रहा हूं
मैं खामोश बस्तर हूं
लेकिन आज मैं बोल रहा हूं

मंगल कुंजाम

Posted on: Oct 11, 2010. Tags: Mangal Kunjam

कॉमनवेल्थ गेम्स पर एक कविता

कभी गिरता है ब्रिज, कभी गिरती है सीलिंग
फिर भी मैनेजमेंट को नहीं है शर्म की फीलिंग
भारत का सम्मान क्यूं रक्खा है ताक पर
पट्टी पढी है क्या सरकार की आट पर
विदेशी कदम कदम पर भारत को कोसते हैं
और हम उनके भव्य इंतज़ाम की सोचते हैं !
पीडा उनको भी है जिनका निवास है मन बस्ती
क्या रक्खा है बनाने में झूठी हस्ती
क्या भूखे पेट कभी खेला है कोई
भूख के कारण तो आम जनता है रोई
जो रकम खेल पर बहाई जा रही है
कोई पूछ सकता है वो कहां से आ रही है
उनके कुछ टुकडों से न जाने कितनी ज़िंदगी ही संवर जाती
कितनो की जीवन नौका पसे भंवर से तर जाती

दुर्दशा

Posted on: Oct 10, 2010. Tags: Durdasha

मेरे सिवा और भी हैं दुर्भागी

घर से निकला तो दुखी था इतना
कि ऐसा क्यों होता है सिर्फ मेरे साथ ही
क्यों हमेशा ली जाती है परीक्षा
मेरे धैर्य की, मेरी योग्यता की
वहां पहुंचा
तो लोगों की लम्बी कतार देख
काफी हल्का हुआ
मैं अकेला नहीं
मेरे सिवा और भी हैं दुर्भागी

अनवर सुहैल

Posted on: Oct 10, 2010. Tags: Anwar Suhail

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