दुनिया गोल है : एक कविता

लोग कहते हैं कि दुनिया गोल है
लेकिन मैं कहता हूं कि दुनिया नहीं दुनिया के लोग गोल हैं

कोई किसी का शांति अमन को लेकर गोल है
कोई किसी का मनी रकम को लेकर गोल है

कहीं लडका लडकी को लेकर गोल है
कभी कभी तो अपने मोहल्ले की लाइन भी गोल है

तो मेरे भले साथी, अब भी दिन है सुधर जाओ
इस गोल होने से बाज आओ
क्योंकि हर एक की ज़ुबां पर इस बात की तौल है
कि एक न एक दिन इस दुनिया से हम सब की लाइन गोल है

Posted on: Oct 15, 2010. Tags: Suraj Dewangan

Maoists abduct three government employees in Chhattisgarh

Afzal khan from Bhopalpatnam in Chhattisgarh is reporting that in last couple of days Maoists have abducted at least 3 government employees. When the employees were abducted some of the family members were traveling in the same bus who requested the maoists to not take away their loved ones. Maoists have assured them that no harm will be done but the employees are yet to released

Posted on: Oct 15, 2010. Tags: AFZAL KHAN CHHATTISGARH

सैनिक की अंतिम इच्छा : एक कविता

साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना

यदि हाल मेरी माता पूछे, मुरझाया फूल दिखा देना
यदि इतना कहने से न माने, जलता दीप बुझा देना

यदि हाल मेरी बहना पूछे, मस्तक तिलक मिटा देना
यदि इतना कहने से न माने, तो राखी तोड दिखा देना

यदि हाल मेरी पत्नी पूछे, मांग सिंदूर मिटा देना
यदि इतना कहने से न माने, तो चूडी तोड दिखा देना

Posted on: Oct 14, 2010. Tags: Ranjana

दिल्ली में अब काम नहीं, क़ाम-न-वेल्थ है

सर पर गठरी
हाथ में छोटे से बच्चे की छोटी छोटी उंगलियां और एक बच्चा गोद में
सूखा पडा गांव में, जीने की कोई गारंटी नहीं

वहां खचाखच भरा प्लेटफॉर्म, और दिल्ली जाने की मची है होड
पारा चालीस पार, स्टेशन पे पानी नहीं
असमंजस में मां, कि पानी ढूंढे या रेल
मैली कुचैली सी एक थैली में एक छोटी सी पोटली
और उस पोटली में छुपा है एक खजाना
चालीस रूपए के कुछ बंधे नोट और कुछ एक सिक्के
और साथ में है बासी रोटियों का खजाना
जब जब बिलखेंगे बच्चे, देखेंगे मां की ओर बढी हुए आंख से
दे दी जाएगी चूसने को यही रोटी लॉलीपॉप की तरह

रेल आई, वह कब चली, पता नहीं, भीड तो बहुत थी
कहने को तो रेल बहुत बडी थी, बीस डिब्बे रहे होंगे
पर उसे और उसके जैसों के लिए दो ही डिब्बे थे
एक इंजन से लगा और एक पीछे को

जब झपकी खुली तो मथुरा में कुछ गिनती चल रही थी
लोगों की
सबको उतारा जा रहा है वहीं पर
क्योंकि दिल्ली में अब काम नहीं है
वहां काम-न-वेल्थ है
वह खडी है प्लेटफार्म पर और सोच रही है कि जाए तो जाए कहां
क्योंकि दिल्ली में अब काम नहीं क़ामनवेल्थ है

प्रशांत दुबे

Posted on: Oct 13, 2010. Tags: Prashant Dubey

ये महंगाई के मारे कमर टूट गे ना : छ्त्तीसगढी गीत

Women from 10 districts of Chhattisgarh has assembled in a 3 days workshop of Chhattisgarh Mahila Manch in Pithora of Mahasamund district. They are singing a song from the workshop. They are also discussing on the vision and mission of the state of Chhattisgarh and trying to understand what is the difference between a platform and an organisation

Posted on: Oct 13, 2010. Tags: Bhan Sahu

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