जीवन में सतत अभ्यास करने से व्यक्ति निपुण होता है, परीक्षा में प्रथम आने का राज...कहानी

राजीव व संजीव दोनों दोस्त एक साथ एक ही कक्षा में पढते थे, राजीव हमेशा प्रथम आता था. जबकि संजीव मुश्किल से पास होता था, संजीव को सब उलाहना देते थे उसके साथ रहते हो उससे कुछ सीखों भी, संजीव ने सोचा क्यों न राजीव से राज जाना जाए, संजीव ने राजीव से पूछा दोस्त तुम कैसे पढते हो प्रथम कैसे आते हो, राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा दोस्त टीचर जो भी पढ़ाते है मै ध्यान लगाकर सुनता हूँ, जो लिखने का होता है उसे मै रोज़ घर आकर दोहराता हूँ. पढने के बाद उसका अभ्यास करता हूँ, राजीव की बात सुनकर संजीव बोला मैं भी लिखकर अभ्यास करूँगा. दोस्तों कहानी का अर्थ यह है कि अभ्यास करने से ही विषय की गहरी समझ हो पाती है.

Posted on: Apr 14, 2018. Tags: USHA SINGH UIKE

सास बहू की कहानी...

ग्राम-रक्षा, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से उषा सिंह उईके एक कहानी सुना रही हैं:
किसी गांव में सास और बहू रहते थे एक दिन सास ने कहा मै तीर्थ जा रही हूँ, जो दूध दही होता है उसे बेच कर पैसा एकत्र कर लेना इसके बाद वो चली गई, चैत्र वैशाख का महीना था उनकी बहू सारा दूध दही पीपल, तुलसी के पेढ पर डाल देती और खाली बर्तन ला कर रख देती, तीर्थ करने के बाद जब सास वापस आई तो पैसे मांगी तो बहू ने सारा दूध पीपल पर डालने की बात बता दी इस पर सास ने कहा जैसा भी हो मुझे पैसे चाहिए, तब बहू पीपल और तुलसी के पास जाकर बैठ गई कहा कि मेरी सास मुझे दूध दही के पैसे मांग रही है मुझे पैसे दो तब पीपल कहता है बेटी हमारे पास पैसे नही है, कंकड़ पत्थर है इन्हें ले जा वह उठा कर अपने घर ले आई जब सुबह सास ने पूछा पैसे दो तो बहू ने अपना कमरा खोला तो देखा कि हीरे मोतीयों से पूरा कमरा जगमगा उठा बहू ने कहा ले लो अपने पैसे, यह देखकर सास के मन में भी लालच आया और वह भी बहू के जैसे ही रोज़ दूध दही पीपल और तुलसी में डालने लगी और बदले में एक दिन बहू जैसे पैसे मांगने लगी पर उसे कुछ नहीं मिला इस कहानी से यह संदेश जाता है कि लालच नही करना चाहिए-

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: USHA SINGH UIKE

दुष्टों के बीच दोस्ती अधिक देर तक नहीं चलती...कहानी -

एक बार गाँव में एक महात्मा आये, गाँव के लोगो ने श्रद्धा से उनके रहने की व्यवस्था की प्रतिदिन ग्रामवासी उनके लिए खाने का प्रबंध कर देते इस तरह से महत्मा का जीवन यापन हो जाता था जब प्रबंध नहीं हो पता तो उपवास रख लेते थे कुछ दिनों बाद महात्मा ने लगातार उपवास किया | तब लोगो ने एक दुधारू गाय ला कर दी जिसे चुराने के लिए एक चोर ने सोची और चोरी करने के लिए निकला तभी उसे रास्ते में एक व्यक्ति मिला जो भूत था उन दोनों में मित्रता हुई और दोनों अपने काम के लिए चले लेकिन जैसे ही काम करने को गए दोनों का विवाद हो गया और दोनों आपस में लड़ने लगे जिससे शोर हो गया जिससे दोनों पकडे गए इससे यह निष्कर्ष निकलता है दुष्टों के बीच दोस्ती अधिक देर तक नहीं चलती। उषा सिंह उइके@7909655194

Posted on: Aug 07, 2017. Tags: USHA SINGH UIKEY

कंजूस बनिया की कहानी...

एक कंजूस बनिया था जो गरीबों का पैसे को लूट कर अपनी तिजोरी भरता था कभी भी उसने दान पुन्य नहीं किया था जब उसकी मौत हुयी तब भी उसने कंजूसी की. मरते समय उसने एक बूढ़ी गाय को ब्राम्हण को दान में दिया और उसी समय बनिए की मृत्यु हो गयी गाय ब्राम्हण के घर पहुचते ही मर गयी यमराज के पास पहुचते ही बनिया को कहा गया कि इसने कभी भी पुन्य का काम नहीं किया इसलिए इसे नरक में डाल देना चाहिए लेकिन इसने एक गाय का दान किया था इसलिए एक दिन के लिए इसे स्वर्ग में रखा जा सकता है, इसलिए यमराज ने पूछा कि तुम सबसे पहले कहाँ जाना चाहते हो बनिए ने कहा स्वर्ग में और यमराज ने कहा कि एक दिन के लिए गाय से कुछ भी कहोगे वो करेगी बनिए ने कहा इस यमराज को मारो वो गाय को मारने दौड़ी गाय यमराज को दौडाते हुए सबसे पहले शंकर जी के पास गयी ,शंकर जी भी भागने लगे और भागते भागते ब्रम्हा जी के पास पहुचे गाय को अपने पास आते देख वो भी भागने लगे भागते-भागते विष्णु जी के पास पहुच गयी इतने में ही बनिए की शक्ति क्षीण हो गयी तब यमराज ने कहा इसे नरक में डाल दो नरक में डालते इसके पहले ही तीनो देवों ने कहा कि हमारे दर्शन करने के बाद कोई भी नरक में नहीं जा सकता है इसलिए उस कंजूस बनिए को स्वर्ग में रख दिया गया | उषा सिंह उईके@7909655194

Posted on: Jun 10, 2017. Tags: USHA SINGH UIKEY