हम बिकाई ला बजरिया में बाजार हमरा से...एक लोकगीत

हम बिकाई ला बजरिया में बाजार हमारा से..
हम तो हई सेंदुरावा जाने ला संसार हमारा के....
युग युग से होला धरती पर अवतार हमारा से...
हम तो हई सेंदुरावा जाने ला संसार हमारा के..
हम ताकि ला जवानिया में श्रृंगार हमारा से...
अग्निया भावर के जोहे गठबंधन जोहे हमारा के.
हम बिकाई ला बजरिया में बाजार हमारा से
हम तो हई सेंदुरावा जाने ला संसार हमारा के...
हमरे चलते ये भैया कतने घरवा अंगना से
अलगा होजाला कटने सुघर सुघर बहिया कंगना से अलग होजाला....
केहू बनी जला सास-ससुर और सार हमरा से
हम बिकाई ला बजरिया में बाजार हमरा से...

Posted on: Jun 06, 2013. Tags: Subhash Gautam

बरखा रानी जरा जम के बरसो, मेरा दिलवर जा न पाए...

बरखा रानी जरा जम के बरसो, मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसों -२
मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसों..
अभी अभी तो आए हैं कहते हैं हम जाएँ हैं -२
तू बरस बरसों बरस ये उम्र भर न जाए रे
बरखा रानी जरा जम के बरसों मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसों -२
मस्त सावन की घटाए.. बिजुरिया चमके जरा-२
यार मेरा डर के मेरे सिने से लग जाए रे..
बरखा रानी जरा जम के बरसों मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसों
बरखा रानी...

Posted on: Jun 04, 2013. Tags: Subhash Gautam

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