ऊँचा निचा पहाड पर्वत नदी नाला हाय रे हमार छोटा नागपुर...सादरी भाषा में लोकगीत

ग्राम-खेरामुत्ता, ब्लाक-राजगंगपुर, जिला-सुन्दरगढ़ (उड़ीसा ) से प्रमिला लकड़ा, करिश्मा पन्ना सादरी भाषा में एक लोकगीत सुना रहे है :
ऊँचा निचा पहाड पर्वत नदी नाला हाय रे हमार छोटा नागपुर-
काले भुइल गेले संगी काले छोइड़ गेले संगी
असम भूटान हरियरी चाय के बागान-
मोर सुन्दर छोटानागपुरे-
वन जंगल कतई सुन्दर सरई फूल फूलेला-
चहकेला चरियां रे, फुद्केला हिरनिया रे-
का लखे हियाँ भईया रे...

Posted on: Jun 25, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS

हो हो हो हाय खेती करना हैं यार...किसानी करमा गीत -

ब्लाक-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास एक करमा गीत गा रही है जो खेती -किसानी पर आधारित है :
हो हो हो हाय खेती करना हैं यार-
वन भूमि के खाली जमीन में खेती करना हैं रे-
हा हा हाय खेती करना यार-
वन भूमि के खाली जमीन में खेती करना हैं रे-
बाँध बनायेंन नागर जोतेंन और बोयेन धान भैया और बोयेन धान-
भाई-बहन सब भूखे मरन.बचाबच प्राण खेती करना हैं यार-
वन- भूमि के खाली जमीन में खेती करना हैं रे-
नाकेदार पुलिस आवे धरके बन्दुक हाथ,भैया धरके बन्दुक हाथ-
दाई-बहिनी रगड़ा देवाय भागीं बचाके जान,खेती करना हैं यार-
हो हो हो हाय खेती करना हैं यार...

Posted on: May 24, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS

निन्यानवे का चक्कर...कहानी -

बालाघाट, (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास ९९ के चक्कर की कहानी सुना रही है, जाड़ा के दिन थे ओंस पड़नी कम हो गई थी, महुआ के सुन्दर-सुन्दर पीले फूल टपकने लगे, ममता और कलावती महुए के फूल बीनने लगी और दुकान में बेचने लगी, ममता महुआ से मिले पैसे को फालतू खर्च करने लगी, कलावती फिजूलखर्च नही करती थी, एक दिन ममता ने कलावती से कहा तुम मुझसे अधिक महुआ संग्रह करती हो और खर्च नही करती हो, तब कलावती ने कहा मैं 99 को 100 बनाने के चक्कर में लगी हूँ तब ममता ने पूछा यह क्या है, तब बताया मेरा पहले ही दिन का महुआ 99 में बिका तभी दुकानदार ने कहा 1 रूपये का महुआ और ले आवों मैं तुम्हे 100 का नोट दूंगा उसी दिन से 99 को 100 बनाने के चक्कर में लगी हूँ, तभी ममता को भी समझ में आया पैसे बचाना चाहिए उस दिन से ममता भी 99 के चक्कर में लग गई |

Posted on: May 19, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS

किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है...प्रेरणा गीत

ग्राम-राम्हेपुर, जिला-बालाघाट, (मध्य प्रदेश) से
सरला श्रीवास एक गीत सुना रही है:
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है-
पराया दर्द जो अपनाए, उसे इन्सान कहते है-
कभी धनवान है कितना, कभी इन्सान निर्धन है-
कही सुख है, कही दुःख है, इसी का नाम जीवन है-
जो मुश्किल में ना घबराए, उसे इन्सान कहते है-
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है-
ये दुनिया एक उलझन है, कही धोका, कही ठोकर-
कोई हँस के जीता है, कोई जीता है रों रों कर-
जो गिरकर फिर सँभल जाए, उसे इन्सान कहते है-
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है...

Posted on: Apr 01, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS

बचपन में माई, काहे कर दी सगाई, मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे...गीत

ग्राम-राम्हेपुर, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास गीत सुना रही है गीत के माध्यम से बेटी अपनी माँ से पूछ रही है कि बचपन में ही मेरी सगाई क्यों कर दी:
बचपन में माई, काहे कर दी सगाई-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
थोड़ी हुई सयानी, छिन ली हाथों से गुड़िया-
चूल्हे चोका, बर्तन तकिया सिमटी मेरी दुनिया-
बैरन भोजाई आग, कैसी लगाई-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
छोटा भय्या जब जाए मदरसा, मै मन मन में रोऊ-
उमर पड़ाई की है फिर भी, घर में बर्तन धोऊ-
चोखट पे माई, लक्ष्मण रेखा बनाई-
कैसे लाघु ये खाई, मोरी माई रे-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
कर दी अगर सगाई, लेकिन शादी जल्दी मत करना...

Posted on: Mar 29, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS

View Older Reports »

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download