तोड के मज़बूरी के बंधन पा लूँ मै भी आत्म सम्मान को...कविता

ग्राम-चरगांव, पंचायत-चरगांव, जिला-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से अंजली सोनवानी एक कविता सुना रही है:
आजादी के पंख लगा के छू मै भी आसमान को-
तोड के मज़बूरी के बंधन पा लूँ मै भी आत्म सम्मान को-
तुफानो से खुद ही लड़ के खुद के दम पर आगे बढ़ के-
चाहूँ मै भी मंजिल पाना अपने गुण सबको दिखलाना-
कैद हो जो पंछी पिंजरे में वो क्या जाने गगन की माया-
तन मन स्वतंत्र हो जब मेरा तभी मानूँ जीवन पाया...

Posted on: May 27, 2019. Tags: ANJLI SONWANI DINDORI MP POEM

हे वीणा वादनी माँ हमें अपनी शरण ले लो, जिभ्या में वास करके विद्द्यायें सभी दे दो...वंदना

ग्राम-चरगांव, पंचायत-भैसवाही, तहसील-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से अंजली सोनवानी एक वंदना गीत सुना रही है:
हे वीणा वादनी माँ हमें अपनी शरण ले लो-
जिभ्या में वास करके विद्द्यायें सभी दे दो-
इस तोतली वाणी में श्रद्धा है न भक्ति है-
तेरा गान करूँ माता ऐसी भी न शक्ति है-
वर दायक हाथों माता धन्य हमें कर दो-
करते हैं आदि शुर गण माँ वंदना तेरी...

Posted on: May 26, 2019. Tags: ANJLI SONWANI DINDORI MP

जो अपने से सदा बड़ो का आदर मान किया करते हैं...कविता-

ग्राम-तरगाँव, पंचायत-भैसवाही, जिला-डिंडोरी (मध्यप्रदेश) से आरती सोनवानी एक कविता सुना रही हैं :
जो अपने से सदा बड़ो का आदर मान किया करते हैं-
पास बड़ो के आने पर उठ सम्मान किया करते हैं-
अतिथि जनो के घर आने पर जो सत्कार करते हैं-
देव समझकर अभिनंदन करते वे बच्चे अच्छे लगते हैं...

Posted on: May 26, 2019. Tags: ARTI SONWANI DINDORI MP POEM

एक दरिया है यहाँ पर दूर तक फैला हुआ, आज अपने बाजुएँ देख पतवारे न देख...गजल

ग्राम-चरगांव, पंचायत-भैंसवाही, तहसील-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से आरती सोनवानी एक गजल सुना रही हैं:
आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख-
घर अन्धेरा देख तू आकाश के तारे न देख-
एक दरिया है यहाँ पर दूर तक फैला हुआ-
आज अपने बाजुएँ देख पतवारे न देख-
अब यक़ीनन ठोस है धरती हकीकत की तरह-
वह हकीकत देख लेकिन खौफ के मारे न देख...

Posted on: May 26, 2019. Tags: ARTI SONWANI DINDORI MP

ज्ञान दीप जलाकर बहना, करना रक्षा अपने हक़ की...बेटियों पर कविता

ग्राम-पडेग़ाव, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल कवि सोनवानी
‘बेटियों’ को लेकर एक कविता सुना रहे है :
ज्ञान दीप जलाकर बहना, करना रक्षा अपने हक़ की-
फिर कभी न कहेगी दुनिया, बेटी पढ़कर क्या करेगी-
नारी धर्म गुणों की खान, कोई कमी नही व्यवहार का-
फ़िर भी बितता कष्ट में जीवन, ताने सहती ससुराल का-
शिक्षा को तुम ढाल बनाकर, ख़त्म करो रुड़ी संस्कार का-
कड़वा घूट कल पढ़े ना पीना, इन अत्याचारों का...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: BAALKAWI SONWANI

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