मुझे घर नहीं बिन और सहारो का बस तेरा सहारा काफी है...प्रेरक गीत

जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से संजीव कुमार दीवाना एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
मुझे घर नहीं बिन और सहारो का बस तेरा सहारा काफी है-
मझदार में डूबने वालों को एक तेरा किनारा काफी है-
बन-बन के सहारे टूटते है रीति पुरानी है जग की-
टूटे न कभी छूटे न कभी बस तेरा सहारा बाकी है-
यहाँ रिश्वत और सिफारिश से कोई काम नहीं बन सकता है-
बिगड़ी संवर जाने के लिए एक तेरा ही सहारा काफी है...

Posted on: Oct 26, 2016. Tags: SANJEEV KUMAR DIWANA

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