Tajmahal, Mumtaz and labourers sweat

Ravi Saxena from Delhi Shramik Sangh says there are many ways of looking at monuments. One can remember the King who build it but not many remembers the hard work and sweat of the labourer which has gone to build it.

Posted on: Sep 19, 2010. Tags: Ravi Saxena

Main kaun hoon : A poem on situation of women

मैं कौन हूं दुर्गा चण्डी काली
या जान की प्याली

मैं कौन हूं मां बेटी बहन बहू
या नाजायज़ लहू
मैं कौन हूं देश की इज़्ज़त, देश का सम्मान
या फिर वेश्या या सामान
मैं कौन हूं मोती चांदी सोना

या कोई खिलौना
चुडैल डायन हैवान या कोई इंसान
मैं कौन हूं
ज़मीन बताए, अम्बर बताए या फिर आप बताएं

मैं कौन हूं

Posted on: Sep 16, 2010. Tags: Ravi Saxena

Main Ram Ko nahee janta...A poem on unorganized laborers

Ravi Saxena of Delhi Shramik Sangathan who fights for rights of unorganized laborers have sent this poem :

मैं राम को नहीं जानता

अल्लाह को नहीं जानता

नानक को नहीं जानता
मसीह को नहीं जानता

भूख की अग्नि में जलते बच्चे
बढती बेरोज़गारी, बढते खर्चे
तेज़ हवाओं से हिलता छप्पर
बरसों से नया कपडा नहीं तन पर

पत्नी की साडी फट चुकी है

मेरी बूढी मां ऐनक के लिए दुखी है

कर्ज़ लौटाने के लिए धमकी देता साहूकार
चार महीने की मज़दूरी खा गया ठेकेदार

अपने दमन, अपने शोषण
अपनी व्यवस्था, अपनी लाचारी
गहरी खाई से गहराती अपनी गरीबी के सिवा
मैं किसी को नहीं जानता

Posted on: Sep 15, 2010. Tags: Ravi Saxena

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