गाँव का पारम्परिक आदिवासी संगीत...

ग्राम-दुधियाटोला, पोस्ट-सरई, जिला-सिंगरौली (मध्यप्रदेश) से रामलखन सिंह टेकाम बता रहे हैं कि आदिवासी समाज में शाम को काम ख़त्म करने के बाद या उनके विशेष आयोजनों में एक साथ बैठकर गीत संगीत और नृत्य करने की परम्परा रही है जो अब धीरे धीरे कम होती जा रही है पर कुछ सुदूर इलाकों में पुराने बुज़ुर्ग लोग आज भी परम्परा को जीवित रखने का प्रयास करते हैं, यह उनका मनोरंजन का साधन भी है क्योंकि उनकी भाषा में तो टीवी या रेडियो में कुछ अधिक नहीं होता जिसमे युवा लोग व्यस्त रहते हैं आज वे ऐसे ही एक मंडली में बैठे हैं और वहां गाए जाने वाले सेवा संगीत को सीजीनेट सुनने वालो को भी अपने मोबाइल फोन के माध्यम से सुना रहे हैं. रामलखन सिंह टेकाम@9644909675.

Posted on: Sep 30, 2017. Tags: RAMLAKHAN SINGH TEKAM

We have poles and wire from 5 years but no electricity, Please call officers...

Ramlakhan is calling from Sakargela village in Deokhar Panchayat of Jaba tehsil in Rewa district in Madhya Pradesh and says in their village 3-400 adivasis live. They have poles and wires from 5 years but electricity connection has not been connected. He talks to some students who tell that they can not study at night. Some villagers are also getting bills. You are requested to call Junior Engineer@9425424363, CEO@9425847145 and Collector@9425903973 to help. Ramlakhan@9111781554

Posted on: Jul 14, 2016. Tags: ELECTRICITY RAMLAKHAN

We've electricity poles but no wire and no electricity, pls call officers to help...

Ramlakhan Sahu is calling from Nashtgavan village in Jaba block of Rewa district in Madhya Pradesh and says more than 1000 people live in their village, they also have electricity poles but no wires and no electricity. He also talks to more people who join him in requesting wires so that the village can get electricity which was promised long back. You are requested to call Collector@9685420819 to help suffering villagers who are forced to live in dark yet. Sahu Ji@8516064869

Posted on: Jun 13, 2015. Tags: ELECTRICITY RAMLAKHAN SAHU

कइयो तीरथ कइके देखेन, सब लाई डारिन पण्डा...बघेली कविता

कइयो तीरथ कइके देखेन, सब लाई डारिन पण्डा
ढ़ोंगी और पाखंडी सबके सब कइ लिहिन हैं धंधा
मंदिर बन गई है दुकान ,न लगाई पूँजी पैसा
छान के रबड़ी माल पूआ , होय गए भैसा
बीता -बीता भर के चुदी राखै ,हाथ भरै के दाढ़ी
भोग लगावै देवता जी का ,आपुन पेलइ दूध के साढ़ी
मूढ़े ,घुटकी,पेटे हाथे मा खौर के चन्दन कानेन मा
पहिन के गेरुआ उन्ना -लत्ता , नहीं आवे पहचाने मा
जांच परत के घेटहर माला ,गैर मन सही झूलै
साझइ पूजा-पाठ सब अपने आगे ढ़ाबे
बड़े-बड़े जे मठाधीस हैं , एयर कोल्ड के बंगला चाही
चेला-चेली मोटर गाड़ी, सातव सुबिधा सगला चाही
मंदिर मा ही जैसे घुसके ,जैसे ढेहरी माँ धरबै मूढ़
जबरन हाथ में बढ़ के डोरा ,रुपया मागै एकउ पूत
घोर के सेंदूर धोपयै चन्दन दूइय ठे रेवरी दे पकड़ाय
पैसा नोचय के खातिर घेरे,जैसे गिद्ध मरी का खाय
गोड़े गिरै चढ़ावै के खातिर ,जेके रोपिया थोरे होय
करुण आयेके आखी काढ़े ,जैसे कर्जा लगी हो
जैसे कर्ज लगी हो.…………………
भैया प्रयाग राज के संगम मा ही असौ दिखेन तमासा
तख्तन में हि बैठे पण्डा ,असैन्याय के खासा
घटिन में आहिन बांध के बछिया जीतै पूंछ धराबै
अगड़म -बगड़म पढ के जल्दी ,रुपया लाई भगावा
साँझ के पहुचै हौली मा ही लैले देसी ठर्रा
नटई के जर भर थुथुर के खासा मारत है गुलठर्रा
जब कि अंधर ,लंगड़ , लूल, बेचारे फटहा धै धै बोरा
भर्ती रस में पेट के खातिर ,फिर मगाई लई -लई खोरा
तोहका नही देबाईया कोऊ,वपुरो को दुई आना
सौ मा एक दुई हमा दयालू निहुर के धै दे दाना
इतना पढ़ेँन लिखेन है अपना पचेन डोगियन को पहिचानी
कहै रामलखन बघेल न भैया ,करै व मनमानी

Posted on: Feb 25, 2014. Tags: Ramlakhan Singh Baghel

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download