सरसों के पियार-पियार फूल लेयक मनला भेजाय सकू...छत्तीसगढ़ी गीत

रूपलाल मरावी ग्राम पंचायत डुमाडांड़ भगतपारा विकासखंड-प्रतापपुर जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़िया भाषा में शिक्षा से संबधित एक गीत सुना रहे हैं:
सरसों के पियार-पियार फूल लेयक मनला भेजाय सकू-
बाहूला भेजा स्कूल म्युला पढ़ावा-
दाई दावाके करते आवे सही मार्ग ला देखावा-
पढ़ी लिखी आगे बडी अपन हक़ अधिकारला जनी ही ही ही-
सोनेक चिड़िया ले बसेरा नवा जोत ले जलाए...

Posted on: Jan 05, 2017. Tags: Ruplal Marawi

ये सखी जोता खेत नाही आवे हो...कर्मा गीत

रूपलाल मरावी ग्राम-धुमाधाड, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से एक कर्मा गीत सुना रहें हैं:
ये सखी जोता खेत नाही आवे हो-
कोन देहि माना रोजी धान हो, ये सखी-
ये सखी जोता खेत नाही आवे हो-
जामे लागी हरियर धान हो, ये सखी-
ये सखी जोता खेत नाही आवे हो...

Posted on: Sep 14, 2016. Tags: RUPLAL MARAWI

Impact: Elephant broke my houses, now got compensation, built new houses...

Ruplal Maravi is visiting Mauharipara in Dandkava village in Pratappur block of Surajpur district in Chhattisgarh where he meets Dharampal whose tow houses were broken by elephants. When he met his last he was living under a Mahua tree and officers were not giving him compensation. After recording a message on CGnet has got a compensation of Rs 89,000 and is living in his new house. He thanks all listener for calling. Maravi@7089415537 ( Original message no: 89835)

Posted on: Jun 17, 2016. Tags: Ruplal Marawi

जंगल-जंगल झाड़ी-झाड़ी तमोर पहाड़ उपरे...जंगल गीत

ग्राम पंचायत-धुम्माडांड, ब्लॉक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ रूप लाल मरावी जंगल में घुमने वाले पर्यटकों के लिए एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
जंगल-जंगल झाड़ी-झाड़ी तमोर पहाड़ उपरे-
आए हवं दाई मैं तोर दुआरे-
पखना ला चुनि-चुनि महला बनाए-
पखना ला चुनि-चुनि गुफा बनाए-
बहुत साले जिनगी गुजारे-
आए हवं दाई मैं तोर दुआरे-
चारा ला अउरा ला महुआ ला कांदा ला-
जड़ी अव बूटी ला खाई के सब ला चीखि दा रे-
जंगल-जंगल झाड़ी-झाड़ी तमोर पहाड़ उपरे-
आए हवं दाई मैं तोर दुआरे...

Posted on: Jan 08, 2016. Tags: RUPLAL MARAWI

चला रे बैला नागर में, खाबो कमाई आपन जांगर में...किसान गीत

ग्राम- धुम्माडाण, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से रूपलाल मरावी बरसात होने से किसानों की खुशियाली के सन्दर्भ में एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
चला रे बैला नागर में-
खाबो कमाई आपन जांगर में-
रोपा लगावे खेतन भर-
सब कोई कमाथन अपने पतन भर-
चला रे बहिनी रोपिनी लगावे खेतनभर,
सब कोई कमाथन अपने पतन भर-
चला रे बैला नागर में-
खाबो कमाई आपन जांगर में...

Posted on: Jul 09, 2015. Tags: Ruplal Marawi

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