बघवा के सवारी में तै चले आबे मईया ओ...देवी गीत-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से समीर सिदार एक देवी गीत सुना रहे हैं :
बघवा के सवारी में तै चले आबे मईया ओ-
कलकत्ता के काली ला सुमरो-
डोंगरगढ़ बमलाई-
सम्मलपुर समलाई ला सुँमिरो-
सम्मालपुर समलाई-
बघवा के सवारी में तै चले आबे मईया ओ...

Posted on: Jun 05, 2019. Tags: CG RAIGARH SAMIR SIDAR SONG

चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड-
अडबड तेंदू चार पके हवे, झन कर तय बिचार-
पान मुखारी तोड़ आन बो, बेटी के हवय सगाई-
पतरी दोना खील डार बो, अडबड हवय मंगाई-
बेटी के सगाई मा, आहीं लोग लुगाई-
ओकर खातीर कहाथो वो, झन कर तय ठागुवाई...

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

बड़ो का अपमान और बेकार का अहंकार नहीं करना चाहिये...कहानी-

एक समय की बात है कलिंग राज्य में मकरध्वज नाम का एक अहंकारी राजा राज्य करता था| उसका कोई संतान नहीं था| एक बार उसके राज्य में दुर्वासा ऋषि आये| उन्होंने अपने आने का संदेश राजा के पास भेजा| राजा अहंकार वस उसके स्वागत के लिए नही आया| दरबारी से बोला ऋषि से कहो महाराज बुला रहे हैं| दरवारी ने वैसा ही किया| ऋषि ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर राजा को श्राप दिया| दुष्ट राजन मैंने तुम्हे स्वागत के लिये संदेश भेजा, लेकिन तुम नहीं आये| मै श्राप देता हूँ, तुम्हारे राज्य में 12 वर्ष तक वर्षा नहीं होगी| ये सुनकर राजा को पछतावा हुआ| वह तुरंत ऋषि के पैर पकड़कर बोला ऋषिवर मुझसे भूल हुई, माफ़ करें| आपका श्राप वापस लें| ऋषि बोले धनुष से निकला बाण वापस तरकश में नही जाता| बहुत बार विनती करने पर ऋषि को उस पर दया आ गया| वे बोले अपने राज्य में यज्ञ करो, गरीबो को दान करो| इससे श्राप ख़त्म हो जायेगा| राजा ने वैसा ही किया और उसका राज्य श्राप मुक्त हो गया| इस तरह उसका अहंकार खत्म हो गया|

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

जीवन सुधर गया...काहानी-

मुंबई से दूर गाँव में एक किसान रहता था| जिसका नाम किसनलाल था| उसका एक लड़का था| नाम बिसनलाल था| वह सुंदर और होशियार था| हाल ही में उसने बारहवीं कक्षा पास किया था| एक दिन उसने अपने दोस्तों के साथ मुंबई देखने जाने का प्लान बनाया| सभी ने अपने माता-पिता जाने के लिये पूछा| घर वालों ने मना किया| तब सभी बिना बताये अपने-अपने घरों से पैसे चुरा कर, टिकट कटाकर मुंबई पहुंच गये| स्टेशन में लोगों की भीड़ में बिसनलाल अपने साथियों से बिछड़ गया| वह अपने साथियों को ढूंढा लेकिन वे नहीं मिले| वहां उसे एक साथी मिला| उसने बिसनलाल को काम दिला में दिया| उसे रहने के लिए जगह भी मिल गया| इधर उसके साथी गाँव वापस आ गये| बिसन के माता-पिता उसके बारे में पूछने लगे| बच्चो ने बताया साथ में गये थे लेकिन वह स्टेशन में हमसे बिछड़ गया| ये सुनकर उनके माता-पिता बहुत रोये और कुछ वर्ष बाद उनका देहांत हो गया| एक दिन बिसन को अपने घर की याद आई और वह छुट्टी लेकर गाँव वापस आया| माता-पिता को न देख वह बहुत दुखी हुआ| वह अपने दोस्तों से मिला, सबका हाल पूछा| फिर अपना सब कुछ बेच कर, वापस चला गया| माता-पिता रहे, लेकिन जीवन सुधर गया|

Posted on: Jun 03, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी-
रंग बिरंगे फूल खिले हैं, कुदरत करती उनकी रखवाली-
हर मौसम में फूलता रहता, जमकर डाली-डाली-
तोड़कर ले जाता उनको, आकर बाग़ का माली-
रंग बिरंगे तितलियाँ आती, बाग़ की सुंदरता बढाने को-
मधुमक्खियां आती मधु चुराने को, भौरे होते गाने को...

Posted on: Jun 02, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

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