A child tells about his village...

My name is Prashant Singh Yadav. I am a student of class 8. I want to tell you about my village. The name of my village is Dabhaura. The part of village we liveis called Choukiya Tola. There are around 100 families live in this part of the village. We are all from the same Yadav caste. Apart from farming we also do animal husbandry for our livelihood. Two power plants near my village have bought a lot of land from the farmers. For more Prashant can be reached at 09752437223

Posted on: Jan 07, 2013. Tags: Prashant Yadav

पेड अब भी आदिवासी हैं...एक कविता

यह कविता प्रशांत सिंह यादव के द्वारा प्रस्तुत है जो कक्षा आठवीं का छात्र है :-

पेड अब भी आदिवासी है !
खो गई सदियाँ मगर फिर भी ,
है अजूबा पेड अब भी ...
पेंड अब भी आदिवासी है !
पत्तियां अब भी पहनती हैं ,
मूल या नंगे अब भी रहती है
पेंड खाली पेड है ,
पेड मुल्ला है ना पंडित है ......
पेड अब भी आदिवासी है !2
जंगलों में हो या नगर में ,
दूर घर से हो या घर में हो .....
हर जगह है धरती में ,
इस दिन होश आने की दवा सी है 2
पेड अब भी आदिवासी है !2
इस सदी के होश आने दवा है ,
वे अब भी आदिवासी हैं ......
सात दिन सोचते हैं वो ,
फुल पत्ते बोलते हैं वो ,
आत्मा के अमर रहने की दवा सी है ......
पेड अब भी आदिवासी है !2
घुट रहा जिंदगी का दम ,
हो गए हैं पेड़ जो कम ,
खो चुकी हैं अपना हरा पन ...
पेड अब भी आदिवासी है !2

Posted on: Jan 03, 2013. Tags: Prashant Yadav

बेटियां शीतल हवाएं हैं...एक कविता

बेटियाँ शीतल हवाएं हैं ,
जो पिता के घर बहुत समय
तक नहीं रहतीं ......
ए तरल जल की पराते हैं ,
लाज की उजली कनाते हैं !!
बेटियां वो प्रजाएँ हैं जो दिल की बात कभी खुल कर
नहीं कहती हैं ...
कुछ दिन इस पार है,

पर नाव है उस किनारे की!!
बेटियां ऐसी घटायें है,
जो छलकती है नदी बनकर
बेटियाँ शीतल हवाएं हैं ,
जो पिता के घर बहुत समय
तक नहीं रहतीं ......

Posted on: Jan 02, 2013. Tags: Prashant Yadav

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