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लिखूं दाई पढ़ूं वो आगू मेहर बढूँ वो...शिक्षा पर रचना -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ PS पुष्प शिक्षा से सम्बंधित एक रचना सुना रहे है:
लिखूं दाई पढ़ूं वो आगू मेहर बढूँ वो-
दाई मोला रोक जनते अपन हक़ भर लडूं वो-
पढना सीखूं लिखना सीखूं हमर परिवार सुधरी-
महूँ कछू बन सकतऊँ जिन्दगी के हर बात सुधरी-
कौन हर बनाते पिंजरा उडत अपन बेटी भर वो-
दाई मोला रोक जनते अपन हक़ भर लडूं वो...

Posted on: Dec 03, 2017. Tags: DR PS PUSHP

दहेजी दानव ने बदराया अदभुत भ्रष्टाचार जी...दहेज़ पर रचना -

तमनार, पडेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि प्रमोद सोनवानी दहेज़ के सम्बन्ध में एक रचना सुना रहे हैं :
दहेजी दानव ने बदराया अदभुत भ्रष्टाचार जी-
मार भगाओ इस दानव को है कलियुग का भार जी-
पुत्र जन्म लेते ही घर में लहर ख़ुशी की छा जाती-
नारी बिन बय जग है सुना तीर कहर क्यों बन जाती-
बेटी है गुणों की खान कोई कमी नहीं संस्कार का-
कैसे हाथ करेंगे पीले ये दुखड़ा दुखिया परिवार-
वो समाज के ठेकेदारों आँख मूंद क्यों बैठे हो-
अनाचार से सदाचार की राह नहीं क्यों चकते हो...

Posted on: Dec 02, 2017. Tags: PS PUSHP

मोरे गाँव गवा के भैया मैं कौनला जाके सुनाऊं...छत्तीसगढ़ी गीत -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि डॉ PS पुष्प एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे है:
मोरे गाँव गवा के भैया मैं कौनला जाके सुनाऊं-
मोरे गाँव गवा के दीदी मैं कहाँ रपट लिखाऊं-
धोती कुर्ता कहाँ पावेते जींस के आगे जमाना-
लुगड़ा साडी कहाँ पावेते हेरम के आगे जमाना-
संस्कृति के बीच भंवर म मोरे गाँव गवा के भैया-
मोरे गाँव गवा के दीदी मैं कहाँ रपट लिखाऊं...

Posted on: Dec 01, 2017. Tags: PS PUSHP

सच्ची-सच्ची बात बताऊँ एक कहानी तुझे सुनाऊं...कविता -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि PS पुष्प एक कविता सुना रहे है:
सच्ची-सच्ची बात बताऊँ एक कहानी तुझे सुनाऊं-
जंगल के नीचे एक गाँव जिसका नाम था देगाँव-
उसी गाँव का लकड़हारा जिसने जीवन में हार न माना-
गया था लेने जलाऊ लकड़ी सचमुच था उसके घर कडकी-
वहां मिला द्तेल हाथी उसके नहीं थे कोई साथी-
पकड़कर पटक दिया रे उसे रौन्दकर फाड़ दिया रे उसे-
गरीबी जीवन हुई रे खत्म घर की आस हुई रे खत्म-
जंगल का हो रहा है नाश इसलिए चऊँ और विनाश-
रोको इस विनाश को पर्यावरण के नाश को
एक एक वृक्ष लगाये सब पर्यावरण सजाये सब...

Posted on: Nov 26, 2017. Tags: PS PUSHP

रक्षा बंधन आ गए भैया राखी कहाँ से लाऊं...रचना -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि PS पुष्प एक स्वरचित रचना सुना रहे है:
रक्षा बंधन आ गए भैया राखी कहाँ से लाऊं-
मैं गरीब या बागी बहना कैसे रस्म निभाऊं-
हाट बाजार में आ गए राखी शहर नजर में छा गई राखी-
पर राखी है कितने महंगे दाम सुन के सबके सब सहमे-
चिलाकर ये राखी वाली ढोल दमका पीट रहे है-
हम गरीब लोग को तो महँगी करके पीस रहे है-
द्रश्य यही देखकर आई हूँ और क्या तुझे सुनाऊं-
मैं गरीब या बागी बहना कैसे रस्म निभाऊं...

Posted on: Nov 26, 2017. Tags: PS PUSHP

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