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सच्ची-सच्ची बात बताऊँ एक कहानी तुझे सुनाऊं...कविता -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि PS पुष्प एक कविता सुना रहे है:
सच्ची-सच्ची बात बताऊँ एक कहानी तुझे सुनाऊं-
जंगल के नीचे एक गाँव जिसका नाम था देगाँव-
उसी गाँव का लकड़हारा जिसने जीवन में हार न माना-
गया था लेने जलाऊ लकड़ी सचमुच था उसके घर कडकी-
वहां मिला द्तेल हाथी उसके नहीं थे कोई साथी-
पकड़कर पटक दिया रे उसे रौन्दकर फाड़ दिया रे उसे-
गरीबी जीवन हुई रे खत्म घर की आस हुई रे खत्म-
जंगल का हो रहा है नाश इसलिए चऊँ और विनाश-
रोको इस विनाश को पर्यावरण के नाश को
एक एक वृक्ष लगाये सब पर्यावरण सजाये सब...

Posted on: Nov 26, 2017. Tags: PS PUSHP

रक्षा बंधन आ गए भैया राखी कहाँ से लाऊं...रचना -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि PS पुष्प एक स्वरचित रचना सुना रहे है:
रक्षा बंधन आ गए भैया राखी कहाँ से लाऊं-
मैं गरीब या बागी बहना कैसे रस्म निभाऊं-
हाट बाजार में आ गए राखी शहर नजर में छा गई राखी-
पर राखी है कितने महंगे दाम सुन के सबके सब सहमे-
चिलाकर ये राखी वाली ढोल दमका पीट रहे है-
हम गरीब लोग को तो महँगी करके पीस रहे है-
द्रश्य यही देखकर आई हूँ और क्या तुझे सुनाऊं-
मैं गरीब या बागी बहना कैसे रस्म निभाऊं...

Posted on: Nov 26, 2017. Tags: PS PUSHP

कठिन से कठिन परिस्थति में धैर्य रखना ही शांति है...एक लघुकथा...

श्रीदेव नामक एक ब्राहमण का एक पुत्र था मोहन, श्रीदेव मोहन को हमेशा शांति की महिमा बताया करते थे जिससे मोहन पर उसका अलग ही असर पड़ा वह दिन का अधिकांश समय एकांत में ही बिताता था. बेटे की इस स्थिति से पिता को भारी चिंता हुई | एक दिन वह पूछा बेटा आजकल काम धंधा कुछ नहीं करते चुप रहते हो क्या बात है मोहन ने बोला पिता आप तो कहते है मनुष्य को शांति जीवन बिताना चाहिए| इसलिए चुपचाप रहता हूँ बेटे की बात को सुनकर श्रीदेव हसंकर बोला बेटे चुपचाप रहने का नाम शांति जीवन नहीं है बल्कि कठिन से कठिन परिस्थति में धैर्य र्रखना ही शांति है| पिता के बातो को समझकर मोहन फिर से कर्मशील बन गया|पी एस पुष्प@9754793710

Posted on: Nov 25, 2017. Tags: PS PUSHP

दीप मेरे नित सांझ तू जल...रचना -

तमनार, पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि डॉ PS पुष्प एक रचना सुना रहे है:
दीप मेरे नित सांझ तू जल-
अन्धकार दे रहा चुनौती-
उससे कर चुके है मनोती-
अब तो जाग जा रे पगले-
करना कुछ तो पहल-
दीप मेरे नित सांझ तू जल...

Posted on: Nov 20, 2017. Tags: PS PUSHP

माँ हो मेरी माँ, हर शाम गरीबी तले, तू शमा की तरह जली...माँ पर रचना -

तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बालकवि PS पुष्प माँ से सम्बंधित एक रचना सुना रहे है:
माँ हो मेरी माँ – हर शाम गरीबी तले-तू शमा की तरह जली-
पालकर तू हमे कठिनाई में-नित शिक्षा दी बन भली-
बिछाई फूल हमारी राहो में-खुद काटो पर चली-
बनके मूरत सहनशीलता की-एक कहानी गढ़ चली-
माँ हो मेरी माँ, हर शाम गरीबी तले जली...

Posted on: Nov 20, 2017. Tags: PS PUSHP

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