बाई मोये पंजीरी खाने, हट पकरे मोडा गरीब को...बुन्देलखंडी गीत

बाई मोये पंजीरी खाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
बाई मोये पंजीरी खाने, बाई मोये पंजीरी खाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
बाई मैं तो खेलन गयों, थो कलुआ मोये टेर ले गयो थो
बाके घरे चून भुंज रहो थो, बाने मौखो तनकई दयो थो
ऐसी नोनी लगी पंजीरी, ऐसी नोनी लगी पंजीरी बामें डरे मखाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
पुरा भरे में मैं फिर आई, कक्को खों तक दया न आई
आज कन्हैया आठें बेटा, आज कन्हैया आठें बेटा बिरथा फिरो रिसाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
तें तो सुनलै बात हमाई मौखों बहुत भूख लग आई
धरो करहिया झट चूल्हें पे, धरो करहिया झट चूल्हे पे अब न करो बहाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने
हट पकरे मोडा गरीब को बाई मोये पंजीरी खाने

Posted on: Jul 13, 2013. Tags: Nitin Bhargava

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