मुँह सी के अब जी ना पाऊँगी, जरा सबसे ये कह दो...

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से निर्मला साहूजी महिला सशक्तिकरण पर एक कविता प्रस्तुत कर रही हैं:
मुँह सी के अब जी ना पाऊँगी-
जरा सबसे ये कह दो-
बाबा कहें, बिटिया पढ़ने न जाना-
अपना मैं ज्ञान बढ़ाउंगी-
जरा सबसे ये कह दो...
अम्मा कहें, बिटिया शीष झुकाना-
सिर को मैं ऊँचा उठाउंगी-
जरा सबसे ये कह दो-
भाई कहे, बहना चौखट न लांघना-
अब ना गुलामी सह पाऊँगी-
जरा सबसे ये कह दो-
दुनियां कहे, मुनियाँ मन की ना करना-
अपने मैं सपने सजाऊँगी-
जरा सबसे ये कह दो-
मुँह सी के अब जी न पाऊँगी-
जरा सब से ये कह दो !

Posted on: Dec 16, 2014. Tags: Nirmala Sahu

स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो...संगठन गीत

स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो
जनता ने तुमको नेता बनाया
क्या-क्या किया, तुमसे आस लगाया
उनकी अभिलाषा पूरी करो
स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो
चुनकर आई अपनी बहना
हक़ है तुम्हारा बैठक में रहना
मिलजुलकर काम करो
स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो
पानी लाती दूर से कितना
उनके दु:खों को, समझो तुम बहना
नल-जल लागू करो
स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो
गाँव में पक्की सड़कें बनाओ
सडकों पर बिजली के खम्भे लगाओ
घर-घर प्रकाश करो
स्वावलंबी गाँव करो, गाँव विकास करो

Posted on: May 04, 2014. Tags: Nirmala Sahu

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