ये जीवन है इस मिटटी का डेला...गीत-

उपररास, ग्राम+पंचायत-छिन्दावाडा, ब्लाक-दरभा, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से चम्पा नाग बस्तर भूमि से सम्बंधित एक गीत सुना रही है :
ये जीवन है इस मिटटी का डेला-
पानी आये तो गल जाना इस मिटटी का डेला...

Posted on: Aug 01, 2020. Tags: BASTAR CG CHAMPA NAG HINDI SONG

हे आमचो शु मुहं कितलो सुन्दरा...हल्बी गीत-

ग्राम+पंचायत-कुटुमसर, ब्लाक-दरभा, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से पूर्णिमा साहू के साथ गाँव की महिला साथी सामबती नाग, तिलावती नाग और चंदा नाग एक हल्बी गीत सुना रहे है :
हे आमचो शु मुहं कितलो सुन्दरा-
गाँव-गाँव ने जातो राहे-
समूह दीदी के मिलतराय-
हे आमचो शु मुहं कितलो सुन्दरा...

Posted on: Jul 30, 2020. Tags: BASTAR CG HALBI SONG SAMBATI NAG TILAVATI NAG

पुल नहीं होने के कारण आने जाने में समस्या हो रही है, कृपया पुल बनाने में मदद करें...

ग्राम-दाबपाल, पंचायत-दाबपाल, ब्लाक-लोहंडीगुडा, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से पूर्णिमा साहू के साथ गाँव के साथी जत्तुरम नाग बता रहे है कि साल के घर से 5 घर तक पुलिया नहीं होने के कारण पानी पूरा भर जाता है उसके कारण आने जाने में बहुत समस्या होती है | पुल बन जायेगा तो आने जाने में सुविधा होगी | इसलिए पुल बनवाने की मांग कर रहे है | इसलिए साथी सीजीनेट के साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि सम्बंधित नम्बरों में बात करके पुल बनवाने में मदद करें : संपर्क नम्बर सरपंच समली मण्डावी@8815621820, जनपद CEO@8889251366. (172263)

Posted on: Jul 29, 2020. Tags: BASTAR CG BRIDGE PROBLEM JATTURAM NAG POORNIMA

नागपंचमी पर्व के बारे में जानकारी...

ग्राम-डभौरा, जिला-रीवा मध्यप्रदेश से कौशल किशोर बता रहे है कि सावन के महीने में नागपंचमी का त्यौहार सब लोग हंसी ख़ुशी से मनाते है और इस त्यौहार में अच्छी-अच्छी चीजे मिठाई गुजिया बनाकर के सब छोटे बड़े लोग खाते है और सुबह उठकर नहा धोकर नाग देवता को दूध पिलाते है और यही खुशियाँ लेकर बड़े-बड़े पेड़ो में झुला बांधकर झूलते है | सब लोग गाते बजाते है | यह परम्परा कई सालो से मनाते आ रहे है | संपर्क@7024891084.

Posted on: Jul 25, 2020. Tags: FESTIVAL NAGPANCHMI KOUSHALI KISHOR REWA MP

सूरज के आते भौर हुआ लाठी ले जिनका शोर हुआ...नागपंचमी कविता-

जिला-राजनंदगाँव छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गन्धर्व आज नागपंचमी का पर्व है, कई लोग उपवास करते है नागदेवता को दूध पिलाते है और कामना करते है कि उनके जीवन में सुख शांति रहे है, पहले तो कुश्ती हुआ करती थी स्थान-स्थान में और आज भी हुआ करती है| उसी सम्बंधित एक कविता सुना रहे है :
सूरज के आते भौर हुआ-
लाठी ले जिनका शोर हुआ-
यह नागपंचमी झम्मक झम-
यह ढोल डामाका झम्मक झम-
मल्लो की जब टोली निकली-
चर्चा निकली फैली गली-गली...

Posted on: Jul 25, 2020. Tags: NAGPANCHMI POEM RAJNANDGAON CG VIRENDRA GANDHARV

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