छत्तीसगढ़ी कविता : चऊ मास के पानी परागे, जाना माना आकाश हर...

ग्राम-देवरी, जिला-सुरजपुर (छतीसगढ़) से मोनू सिंह कश्यप एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहा हैं :
चऊ मास के पानी परागे, जाना माना आकाश हर-
चाउर सही छरा गे-
जग-जग ले अब चंदा उगथे, बादल भईगे फरिहर-
चारों खुट ले पृथ्वी माता दिखथे हरियर-हरियर-
रिगबिग ले अन्पुरना हर खेतन खेत मा छा गे-
नदियाँ अउ तरिया पानी कमती होयें लागीस-
रद्दा के चउ मॉस के चिखला झंझट्टा हा भगीस-
बने पेट भर पृथ्वी हर आज अघागे-
लक्ष्मी ला लौटाए खातिर, जब देवता अगुवाईस-
जब-जब ले पुराइन पाना, के डसना दसाइअन-
रिगबिग फेर कमल फुल हर, तरिया भर छतरा गे-
चारों खुट गे चारुन फुल, फूदक थे चिरय-चिरगुन...

Posted on: Nov 09, 2019. Tags: MONU SINGH KASHYAP SONG SURAJPUR CG

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download