सूरज की रोशनी से लोग परेशान...गर्मी के ऊपर कविता -

ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुगरी, जिला-मंडला, (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी गर्मी के ऊपर एक कविता सुना रहे है :
सूरज की रोशनी से लोग परेशान...
टीम की टहनियों पर, मचल उठा गौर-
आया है उमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही, जाता है अब जाग-
दिनभर बरसता है, धरती पर आग-
हवा नही रख पाती, गर्मी पर गौर-
आया है उमस भरा, गर्मी का दौर...

Posted on: May 23, 2017. Tags: MOHAN MARAVI

वर्षा जल को रोकिये, हर बूँद का हो काम...पानी पर कविता-

ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुगरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी सूखे और पानी के उपयोग पर एक कविता सुना रहे हैं :
पानी मत धोव पानी है अनमोल ,नहीं चुका सकते हम पानी का मोल-
धरती पे पानी नहीं बढ़ रहा है पाप ,खुदिर पड़ता जा रहा किसी का संसार – वर्षा जल को रोकिये,हर बूद का हो काम – चीपर में पोखर बने गाव-गाव में तालाब – पानी का हम मोल समझे ,पानी सबकी जान – कुढ़ देह थक जायेंगे जब संकट होगी ज्ञान – सुखती धरती मागे पानी ,पानी मागे पेड़-
बहता पानी रोकिये ,बने खेती के मेड...

Posted on: Apr 04, 2017. Tags: MOHAN MARAVI

नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर...कविता

ग्राम-छतरपुर, विकासखण्ड-घुघरी, जिला-मंडला,(मध्यप्रदेश) से
मोहन मरावी गीत सुना रहे है :
नीम की टहनियों पर मचल उठा बोर-
आया है ऊमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही जाता है-
जाग दिन भर बरसता है धरती पर आग-
हवा नहीं रख पती है गर्मी पर-
गोर लुवो के झोके से झुलस रहा दात-
गर्मी ने दे डाली कपड़ो को मात-
चली गई एसे में ठंडक की ठोर-
आता यदि बादल का टुकड़ा जिस ओर-
फैलाते उसके ही आगे हम हाथ-
थोड़ी सी छाव तभी होती सर मोर-
दिन भर के बाद कही आती जब शाम-
तब जा के मिल पाता मन को आराम-
मगर रात में होती अकुलाहट और...

Posted on: Apr 02, 2017. Tags: MOHAN MARAVI

सूरज अब जल्दी ही जाता है जाग, दिनभर बरसता है धरती पर आग...कविता

ग्राम-छतरपुर, पोस्ट-गजराज, विकासखण्ड-घुगरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी एक कविता सुना रहे है:-
नीम की टहनियों पर, मचल उठा बोर-
आया है उमस भरा गर्मी का दौर-
सूरज अब जल्दी ही जाता है जाग-
दिनभर बरसता है धरती पर आग-
हवा नही रख पाती गर्मी का दौर-
आया है उमस भरा गर्मी का दौर...

Posted on: Mar 30, 2017. Tags: MOHAN MARAVI

दाई हो दाई हो नहीं करूँ बिहाव उम्र नहीं है पच्चीस की...देहाती गीत

ग्राम-छतरपुर, पोस्ट-गजराज, विकासखंड-घुघरी, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से मोहन मरावी एक गीत सुना रहे है:
दाई हो दाई हो नहीं करूँ बिहाव उम्र नहीं है पच्चीस की-
पढ़ेला जाऊं दे देना बासी मिर्चा चटनी ला पिस के-
होई बिहाव मोरो होई जो लईका होई जो आये...

Posted on: Feb 02, 2017. Tags: MOHAN MARAVI

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