जमीदार का टेक्टर...कविता

लखन सिंह मरावी ग्राम पटनी तहसील परतापुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं :
जमीदार का टेक्टर दौड़े भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
हमरे बुजुर्ग जब आये जंगल थे इस गाँव में-
काट-काट के पेड़-पेड़ को खेत बनाया गाँव में-
मालिक भी हम नौकर हो गये भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
बड़की बिटिया की शादी में खेत रहा था रेन में – बर्तन,बैला,चानी बिक गए व्याज बकाया मोल में – सूदखोर की परवा है ये भैयाजी की राज में – भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में – रात अंधेरी बरखा बारी गए निकाली धाम से-
पेड़ तले परिवार बसाए हुए पराए गाँव से-
गाँव की घटिया भुगढ़ी घुमे रानीजी की राज में-
कब तक अत्याचार सहेंगें आजादी के नाम पे-
जल्दी रोको फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जंजीरों को फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जीना है तो एक हो जाओ दादा हीरा मरकाम की राज में...

Posted on: Jan 31, 2017. Tags: Lakhan Singh Marawi

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