Impact : 2 नवंबर 2018 को सीजीनेट में अपनी समस्या को रिकॉर्ड किया था| फरवरी 2019 में मुवावजा मिल गया-

ग्राम पंचायत-कुप्पा, ब्लॉक-ओड़गी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से लखन सिंग नेताम बता रहे हैं| 3 साल पहले उनके चार बैलो पर आकासीय बिजली गिर जाने से मौत हो गई थी| जिसके लिये उन्होंने कार्यालयों में आवेदन दिया था| लेकिन कोई कारवाही नहीं हो रही थी| तब उन्होंने 2 नवंबर 2018 को सीजीनेट में अपनी समस्या को रिकॉर्ड किया था| जिसके बाद फरवरी 2019 में उन्हें मुवावजा मिल गया| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों और संबंधित अधिकारियों को धन्यवाद दे रहे हैं| लखन सिंग नेताम@8889362032.

Posted on: Apr 26, 2019. Tags: CG IMPACT STORY LAKHAN SINGH NETAM ODGI

गाँव का पारम्परिक आदिवासी संगीत...

ग्राम-दुधियाटोला, पोस्ट-सरई, जिला-सिंगरौली (मध्यप्रदेश) से रामलखन सिंह टेकाम बता रहे हैं कि आदिवासी समाज में शाम को काम ख़त्म करने के बाद या उनके विशेष आयोजनों में एक साथ बैठकर गीत संगीत और नृत्य करने की परम्परा रही है जो अब धीरे धीरे कम होती जा रही है पर कुछ सुदूर इलाकों में पुराने बुज़ुर्ग लोग आज भी परम्परा को जीवित रखने का प्रयास करते हैं, यह उनका मनोरंजन का साधन भी है क्योंकि उनकी भाषा में तो टीवी या रेडियो में कुछ अधिक नहीं होता जिसमे युवा लोग व्यस्त रहते हैं आज वे ऐसे ही एक मंडली में बैठे हैं और वहां गाए जाने वाले सेवा संगीत को सीजीनेट सुनने वालो को भी अपने मोबाइल फोन के माध्यम से सुना रहे हैं. रामलखन सिंह टेकाम@9644909675.

Posted on: Sep 30, 2017. Tags: RAMLAKHAN SINGH TEKAM

जमीदार का टेक्टर...कविता

लखन सिंह मरावी ग्राम पटनी तहसील परतापुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं :
जमीदार का टेक्टर दौड़े भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
हमरे बुजुर्ग जब आये जंगल थे इस गाँव में-
काट-काट के पेड़-पेड़ को खेत बनाया गाँव में-
मालिक भी हम नौकर हो गये भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
बड़की बिटिया की शादी में खेत रहा था रेन में – बर्तन,बैला,चानी बिक गए व्याज बकाया मोल में – सूदखोर की परवा है ये भैयाजी की राज में – भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में – रात अंधेरी बरखा बारी गए निकाली धाम से-
पेड़ तले परिवार बसाए हुए पराए गाँव से-
गाँव की घटिया भुगढ़ी घुमे रानीजी की राज में-
कब तक अत्याचार सहेंगें आजादी के नाम पे-
जल्दी रोको फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जंजीरों को फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जीना है तो एक हो जाओ दादा हीरा मरकाम की राज में...

Posted on: Jan 31, 2017. Tags: Lakhan Singh Marawi

18 दिसंबर 2016 को बोकारो झारखंड में भोजपुरी दिवस में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रण...

लाखन सिंह शिवराज बता रहे हैं कि 18 दिसंबर 2016 को बोकारो में भोजपुरी दिवस मनाया जा रहा है जिसमे मुख्य अतिथि माननीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह होंगे, विशिष्ट अतिथि मनोज तिवारी सांसद होंगे । बोकारो जिला अध्यक्ष कला मंच सतेन्द्र ओझा, भोजपुरी परिवार के जिला सचिव सत्यनारायण चौधरी इस कार्यक्रम को उद्दघाटन करेंगे । कार्यक्रम में बिहार, झारखंड और बंगाल के भोजपुरी साथी उपस्थित होंगे । वे बता रहे हैं इस कार्यक्रम में भाग लेने वालो के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था की गयी है तो भोजपुरी भाई बहन इस कार्यक्रम में भाग लेवे तथा इस कार्यक्रम सफल बनाएं। वे इस सन्देश को सीजीनेट स्वर के माध्यम से अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने की बात कह रहे है | अधिक जानकारी के लिए लाखन सिंह@9431581566

Posted on: Dec 14, 2016. Tags: LAKHAN SINGH

कइयो तीरथ कइके देखेन, सब लाई डारिन पण्डा...बघेली कविता

कइयो तीरथ कइके देखेन, सब लाई डारिन पण्डा
ढ़ोंगी और पाखंडी सबके सब कइ लिहिन हैं धंधा
मंदिर बन गई है दुकान ,न लगाई पूँजी पैसा
छान के रबड़ी माल पूआ , होय गए भैसा
बीता -बीता भर के चुदी राखै ,हाथ भरै के दाढ़ी
भोग लगावै देवता जी का ,आपुन पेलइ दूध के साढ़ी
मूढ़े ,घुटकी,पेटे हाथे मा खौर के चन्दन कानेन मा
पहिन के गेरुआ उन्ना -लत्ता , नहीं आवे पहचाने मा
जांच परत के घेटहर माला ,गैर मन सही झूलै
साझइ पूजा-पाठ सब अपने आगे ढ़ाबे
बड़े-बड़े जे मठाधीस हैं , एयर कोल्ड के बंगला चाही
चेला-चेली मोटर गाड़ी, सातव सुबिधा सगला चाही
मंदिर मा ही जैसे घुसके ,जैसे ढेहरी माँ धरबै मूढ़
जबरन हाथ में बढ़ के डोरा ,रुपया मागै एकउ पूत
घोर के सेंदूर धोपयै चन्दन दूइय ठे रेवरी दे पकड़ाय
पैसा नोचय के खातिर घेरे,जैसे गिद्ध मरी का खाय
गोड़े गिरै चढ़ावै के खातिर ,जेके रोपिया थोरे होय
करुण आयेके आखी काढ़े ,जैसे कर्जा लगी हो
जैसे कर्ज लगी हो.…………………
भैया प्रयाग राज के संगम मा ही असौ दिखेन तमासा
तख्तन में हि बैठे पण्डा ,असैन्याय के खासा
घटिन में आहिन बांध के बछिया जीतै पूंछ धराबै
अगड़म -बगड़म पढ के जल्दी ,रुपया लाई भगावा
साँझ के पहुचै हौली मा ही लैले देसी ठर्रा
नटई के जर भर थुथुर के खासा मारत है गुलठर्रा
जब कि अंधर ,लंगड़ , लूल, बेचारे फटहा धै धै बोरा
भर्ती रस में पेट के खातिर ,फिर मगाई लई -लई खोरा
तोहका नही देबाईया कोऊ,वपुरो को दुई आना
सौ मा एक दुई हमा दयालू निहुर के धै दे दाना
इतना पढ़ेँन लिखेन है अपना पचेन डोगियन को पहिचानी
कहै रामलखन बघेल न भैया ,करै व मनमानी

Posted on: Feb 25, 2014. Tags: Ramlakhan Singh Baghel

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