गोंडी संस्कृति के अनुसार जब युवती को मासिकधर्म हो रहा है वह उस समय गोटुल में नहीं जा सकती...

ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बस्तुराम भोगा, जुन्गुराम आचला, सीताबाई, हिन्दूबाई, सेवंता और छन्नोबाई गोंडी भाषा में गोटुल संस्कृति के बारे में जानकारी बता रहे हैं |गोटुल में क्या-क्या होता है: गोटुल में गाँव में कोई भी समस्या हो कोई गलती करता है इन सब का गोटुल में ही फैसला किया जाता है और गोटुल में शाम को सिर्फ़ वे लोग ही जा सकते है जिनका शादी नहीं हुआ है जैसे बच्चे से लेकर युवक-युवतियां ही नाच गाना कर सकते है |जो युवती मासिकधर्म से रहती हैं, उसका गोटुल में प्रवेश वर्जित है जितने दिन तक उसका पीरियड होता है उतने दिन तक गोटुल में नहीं जा सकती | पीरियड होने के बाद ही गोटुल में जा सकती है|

Posted on: Sep 06, 2018. Tags: BASTURAM BHOGA CG CULTURE GONDI GOTUL KANKER KOYLIBEDA

हमारे गाँव में रोड नहीं है, रास्ते में कीचड़ होने से आने जाने में बहुत दिक्कत होती है, कृपया मदद करे

ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, पोस्ट-तेकामेटा, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सत्तुराम यादव बता रहे हैं कि उनके गाँव में 350 की जनसंख्या है, रोड नही है जिससे लोगों को आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, अधिकतर उन्हें बरसात के दिनों में रास्ते में अधिक कीचड़ होने से असुविधा होती है| अधिक स्वास्थ्य खराब होने से मरीज को चारपाई से आधे रास्ते तक ले जाने के बाद हास्पिटल की गाड़ी के द्वारा चिकित्सा केन्द्र तक पहुंचाया जाता है, कई मरीज रास्ते में ही अपना दम तोड़ चुके हैं, इसके लिए उन्होंने कई बार समबन्धित अधिकारीयों को लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नही हुआ: कलेक्टर@9425263044, CEO@7646807645. संपर्क@6267298776.

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG KANKER KOYLIBEDA ROAD SATTURAM YADAV

वनांचल स्वर : यहां महिला-पुरुष एक साथ मिलकर खेती का सब काम करते हैं, हल भी चलाते हैं...

ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, प्रखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ में आज गाँव की महिलाएं शांति, रमीता, प्रियंका और तुलसी बोगा हैं जो बता रहे हैं कि इस क्षेत्र में पुरुषों के साथ महिलाएं भी नागर फांदते हैं या हल चलाने का काम करती हैं, वे रोपा के समय में चिक्खल (जमीन रोपा लगाने योग्य जमीन बनाने) का काम भी करती हैं, सभी रोपा गाड़ने का काम भी करते हैं. घर में पुरुष होने के बाद भी महिलाएं जुताई करती हैं, वे प्रातः काल उठकर सभी तरह के काम झाड़ू लगाना, पानी भरना, खाना बनाना, उसके बाद हल चलाने और रोपा लगाने अपने-अपने खेतों में जाते हैं, ये सब, सभी महिला-पुरुष मिल जुलकर काम करते हैं |

Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG KANKER KOYLIBEDA VANANCHAL SWARA

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