भात पेज कईसन चुरत हवे...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पटियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है;
भात पेज कईसन चुरत हवे-
जरहा लुठी कईसन जरत हवे-
कहरा कईसन ठरत हवे-
मने मन मा झुरत हवे-
लुटा गे खेत खनिहार-
भात पेज कईसन चुरत हवे...

Posted on: Feb 28, 2020. Tags: CG KNHAIYALAL PATIYARI RAYGADH

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