प्रेणना लोकगीत : ऐसा जमाना आया यार है, बिना पढ़े से सब बेकार है..

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से लल्लू केवट एक प्रेणना लोकगीत सुना रहे है:
ऐसा जमाना आया यार है-
बिना पढ़े से सब बेकार है-
अनपढ़ का इज्जत नही होता है-
आगे चल कर वह प्रतिदिन रोता है-
दिनों-दिनों बढ़ता परिवार है-
जब कोई लेटर घर में आता है-
पड़ोसी के घर में ले के जाता है-
क्योकि पढने से वह लाचार है-
बिना बढे से सब बेकार है...

Posted on: Sep 21, 2019. Tags: ANUPPUR CG LALLU KEWAT

कबूतर एक पक्षी का नाम ख़त पहुँचाना इसका काम...कविता-

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से लल्लू केवट एक कविता सुना रहे हैं :
कबूतर एक पक्षी का नाम ख़त पहुँचाना इसका काम-
प्यारा-प्यारा है खरगोश सबसे न्यारा है खरगोश-
गमले में है फूल खिला तितली इन पर डेरा डाले-
कितना सुंदर है ये घर हम सब रहते हैं इसके अंदर-
चुन्नू चमचम लेकर आओ चम्मच से तुम चम्मच को खाओ-
छतरी मेरे मन को भाये वर्षा से यह मुझे बचाये...

Posted on: Sep 17, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP POEM

काली कोयल बोल रही है...लोकगीत-

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से लल्लू केवट एक लोकगीत सुना रहे हैं:
काली कोयल बोल रही है डाल-डाल पर डोल रही है-
कुहू-कुहू कर गीत सुनाती कभी नहीं मेरे घर आती-
सुंदर और सजीला आम, कितना रंग रंगीला आम-
सब के मन को भाता आम,कितना रंग रंगीला आम-
काली कोयल बोल रही है डाल-डाल पर डोल रही है-
कुहू-कुहू कर गीत सुनाती कभी नही मेरे घर आती...

Posted on: Sep 17, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP SONG

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ...कविता-

ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से भागवती केवट एक कविता सुना रही हैं:
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ-
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ-
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ-
चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ-
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक-
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक...

Posted on: Sep 16, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP SONG

भारत माता का सपूत आजादी का दीवाना था...कविता-

ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से तरंग, कविता, भागवती केवट एक कविता सुना रहे हैं:
भारत माता का सपूत आजादी का दीवाना था-
हंस कर झूल गया फांसी पर भगतसिंह मस्ताना था-
नौ जवान वह पंजाबी गजब शेर का दिल वाला था-
देश, प्रेम का रस पीकर वह बना हुआ था मतवाला-
दिन में चैन, रात में नींद कभी उसे नही आती थी...

Posted on: Sep 15, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP POEM

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