छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो...कविता

ग्राम-बसंतनगर, भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से काशीराम सिन्हा एक कविता सुना रहें है :
छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो-
कुछ सपनो के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है-
सपना क्या है नैन सेज पर सोया हुआ आंख का पानी-
और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नीद जवानी-
गीली उमर बनाने वालो दोबे बिना नहाने वालो-
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है...

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: KASHIRAM SINHA

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