हसवाकर कर दो पस्त पस्त, मै बात बताऊ मस्त मस्त...हास्य कविता

ग्राम-सिवनी, मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कांता शर्मा एक हास्य कविता सुना रहे है:
हसवाकर कर दो पस्त पस्त, मै बात बताऊ मस्त मस्त-
रिश्तों में साली, खाने में थाली चाय की प्याली, शहरोँ में नाली-
रंगों में काली बगिया में माली, देने में गाली मै बात बताऊ, सख्त सख्त-
पहनने में पैजामा रिश्ते में मामा, अनाज में सामा नामों में रामा-
फलों में आमा सुबह और शामा, करता है सूरज गस्त गस्त
मैं बात बताऊ मस्त मस्त-
आदर में आप सूटिंग में नाप, रिश्ते में बाप, उद्दण्ड को श्राप दोषों में पाप
मैं बात बताऊ मस्त मस्त...

Posted on: Apr 18, 2018. Tags: KANTA SHRAMA

चार कदम दूर रहो, दूर रहो, दूर रहो, बेईमान उधारी से, चार कदम दूर रहो...गीत

ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा एक गीत सुना रहे है:
चार कदम दूर रहो, दूर रहो, दूर रहो, चार कदम दूर रहो-
मशहूर दोपहरी से, एक नैन उधारी से-
बेईमान उधारी से, शैतान भिकारी से, चार कदम दूर रहो-
एक आश पराई से, घर बैठे जमाई से-
सच्चे की कमाई से, बदनाम भौजाई से-
एक व्यर्थ लड़ाई से, मुह ज़ोर लुगाई से, चार कदम दूर रहो-
एक बैध अनाड़ी से, घोड़े की पिछाड़ी से, चार कदम दूर रहो, चार कदम दूर रहो...

Posted on: Apr 18, 2018. Tags: KANTA SHARMA

मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली...भ्रूण हत्या पर कविता

ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा भ्रूण हत्या के बारे में एक कविता सुना रहे है:
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले-
ममता से तेरा मुख, एक बार तो खिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली-
माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली, ऐसा ही किया होता, जो माता तुम्हारी-
होती कहा बतावो अस्तित्व हमारी, तू भी तो आख़िर, माँ के आंचल तले पली-
सोचो कि क्या तेरी आत्मा धिक्कारती नही, क्यों तूने लाई जीवन सवारती नही-
क्या तेरे अन्तरात्मा में ना हो ख़लबली, माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए, मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए...कविता

ग्राम-सिवनी, ब्लॉक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता प्रसाद शर्मा एक कविता सुना रहे है:
है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए-
मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए-
देवता सरीखे पिता माँता हो, स्नेही भ्राता हो-
मिलनसार नाता हो, पुत्र सा जमाता हो-
प्रदूषित ना अन्न हो, शोषित ना मन हो-
आत्मा प्रसन्न हो, सभी लोग धन्य हो-
अच्छा प्रशासक हो, बुराई का नाशक हो-
धर्म का उपाशक हो, सत्य सदा भाषक हो-
शिक्षा में शिष्टाचार हो, आदर सत्कार हो...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

गेली मुजफ्फरपुर बाजार बठली सोना र दुकान...बिहार से निर्मल गीत

ग्राम-मालीघाट,जिला- मुजफ्फरपुर (बिहार) से कान्ता देवी निर्मल एक लोकगीत सुना रही है :
गेली मुजफ्फरपुर बाजार बठली सोना र दुकान – गिलिया मुजफ्फरपुर बाजार बठली सोना र दुकान – पिया हो मन करईया टीका झुमका केले के – हौल सिनेमा देखे के न – पिया हो मन करईया टीका झुमका केले के – औल सिनेमा देखे के न – अबत पिया पिया देखिन की अब त सासू लेलाथी – ससुरा बड़ा दुःख देला जवानी म,याद रखिए बिहारी ने न...

Posted on: Nov 24, 2016. Tags: KANTA DEVI

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