मैं अपने आधे खेत में गोबर खाद का उपयोग करती हूँ, और आधे खेत में सरकारी...

ग्राम मडेली, तालुका-भामरागड, जिला गडचिरोली (महाराष्ट्र ) से कांता तलांडे बता रही है अलाटी कछार में 3 वर्ष से कोतवाल का काम करती है कई तरह का काम करना पड़ता है जैसे पंचायत में शासन का कोई योजना आया उसे पूरे गाँव में जाकर बताना पंचायत का देखभाल व् झाड़ू पोछा करना इसके अलावा घर में खेती-बाड़ी का काम करना ऐसे ही जीवन यापन करते है वे अपने आधे खेत में गोबर खाद का उपयोग करती हैं और आधे में सरकारी | उनको यह समझ है कि सरकारी खाद का उपयोग करने से ज़मीन खराब होती है |(168474).CS

Posted on: Jun 02, 2020. Tags: BHAMRAGAD GADCHIROLI MH KANTA TALAANDE STORY

हसवाकर कर दो पस्त पस्त, मै बात बताऊ मस्त मस्त...हास्य कविता

ग्राम-सिवनी, मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कांता शर्मा एक हास्य कविता सुना रहे है:
हसवाकर कर दो पस्त पस्त, मै बात बताऊ मस्त मस्त-
रिश्तों में साली, खाने में थाली चाय की प्याली, शहरोँ में नाली-
रंगों में काली बगिया में माली, देने में गाली मै बात बताऊ, सख्त सख्त-
पहनने में पैजामा रिश्ते में मामा, अनाज में सामा नामों में रामा-
फलों में आमा सुबह और शामा, करता है सूरज गस्त गस्त
मैं बात बताऊ मस्त मस्त-
आदर में आप सूटिंग में नाप, रिश्ते में बाप, उद्दण्ड को श्राप दोषों में पाप
मैं बात बताऊ मस्त मस्त...

Posted on: Apr 18, 2018. Tags: KANTA SHRAMA

चार कदम दूर रहो, दूर रहो, दूर रहो, बेईमान उधारी से, चार कदम दूर रहो...गीत

ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा एक गीत सुना रहे है:
चार कदम दूर रहो, दूर रहो, दूर रहो, चार कदम दूर रहो-
मशहूर दोपहरी से, एक नैन उधारी से-
बेईमान उधारी से, शैतान भिकारी से, चार कदम दूर रहो-
एक आश पराई से, घर बैठे जमाई से-
सच्चे की कमाई से, बदनाम भौजाई से-
एक व्यर्थ लड़ाई से, मुह ज़ोर लुगाई से, चार कदम दूर रहो-
एक बैध अनाड़ी से, घोड़े की पिछाड़ी से, चार कदम दूर रहो, चार कदम दूर रहो...

Posted on: Apr 18, 2018. Tags: KANTA SHARMA

मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली...भ्रूण हत्या पर कविता

ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा भ्रूण हत्या के बारे में एक कविता सुना रहे है:
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले-
ममता से तेरा मुख, एक बार तो खिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली-
माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली, ऐसा ही किया होता, जो माता तुम्हारी-
होती कहा बतावो अस्तित्व हमारी, तू भी तो आख़िर, माँ के आंचल तले पली-
सोचो कि क्या तेरी आत्मा धिक्कारती नही, क्यों तूने लाई जीवन सवारती नही-
क्या तेरे अन्तरात्मा में ना हो ख़लबली, माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए, मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए...कविता

ग्राम-सिवनी, ब्लॉक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता प्रसाद शर्मा एक कविता सुना रहे है:
है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए-
मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए-
देवता सरीखे पिता माँता हो, स्नेही भ्राता हो-
मिलनसार नाता हो, पुत्र सा जमाता हो-
प्रदूषित ना अन्न हो, शोषित ना मन हो-
आत्मा प्रसन्न हो, सभी लोग धन्य हो-
अच्छा प्रशासक हो, बुराई का नाशक हो-
धर्म का उपाशक हो, सत्य सदा भाषक हो-
शिक्षा में शिष्टाचार हो, आदर सत्कार हो...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

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