गरीब का 10 हजार का लोन पास नही होता पर बड़े व्यापारी को करोड़ों आसानी से मिल जाता है...

आज के समय में कार्यालयों के भ्रष्ट अधिकारीयों के कारण स्थिति ऐसी हो गई कि वहां उपरी आवरण देख कर काम किया जाता है, यदि कोइ गरीब इंसान फटे, पुराने कपड़े पहनकर किसी कार्यालय में जाता है तो उसके काम को टाल दिया जाता है बार-बार प्रयास करने के बाद भी काम नही होता| अधिकारी, कर्मचारी, सरकार कोई ध्यान नहीं देते| इसके विपरीत जब किसी व्यपारी का काम होता है तो आसानी से हो जाता है| एक तरफ एक उद्योगपति को लाखो, करोड़ो रुपए का लोन आसानी से मिल जाता है भले ही वह लेकर भाग जाए| लेकिन एक गरीब, किसान, मजदूर 5-10 हजार के लोन के लिए कार्यालय के चक्कर काटते रह जाता है लेकिन लोन पास नहीं हो पाता ऐसे सरकार और व्यवस्था की जितनी निंदा की जाए कम है|

Posted on: Mar 23, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIHARI

हो माँ, मै तोर कोरा के बेटी हो, मोला आन दे जग मा...छत्तीसगढी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीहारी एक छत्तीसगढी कविता सुना रहे है :
हो माँ, मै तोर कोरा के बेटी हो, मोला आन दे जग मा-
मै तोर कोरा मा खेलहूँ ओ, बड़े होंहू खेलहूँ, कुदहूँ-
पढहूँ, लिखहूँ, आगे बढहूँ ओ-
तोर नाम ला रोशन करहूँ, तोर संग मा मै रहूँ ओ-
तोर काम मा मै हांथ बटाहूँ...

Posted on: Mar 17, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIHARI

बेटी चली पराई घर मात-पिता का घर छोड़ी...गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छात्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक कविता सुना रहे हैं :
बेटी चली पराई घर मात-पिता का घर छोड़ी-
सखी सहेली सबको छोड़ी आई सास ससुर की घर-
अपने दिल पर पत्थर रखकर छोड़ चली पिया का घर-
सास ससुर ननद देवर सबका बनाया अपना घर-
पर लोभी सास ससुर ने उसको कर दिया घर से बेघर-
भेडीयों के बीच में आई लूट लिये जीवन भर की कमाई...

Posted on: Mar 17, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIHARI

नंद के नंदा आनंद कंदा बाल मुकुंदा हे जगवंदा...भजन

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक भजन गीत सुना रहे हैं :
नंद के नंदा आनंद कंदा बाल मुकुंदा हे जगवंदा
जब-जब बढा धरती का भार तूने लिया अवतार
कली काल का हुआ विस्तार, कब लोगे अवतार
नंद के नंदा आनंद कंदा हे बाल मुकुंदा हे जग वंदा...

Posted on: Mar 12, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIHARI

पुकारी है परोपकारी है नहीं चाहती मान सम्मान...प्रकृति पर कविता-

ग्राम-तमनार, रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीहारी एक कविता सुना रहे हैं :
पुकारी है परोपकारी है नहीं चाहती मान सम्मान – सबके ऊपर स्नेह लुटाती ममता मई एक समान – ठौर देती अन्न जल लुटती वो करुणा मई महान – गरीब अमीर सभी के ऊपर दृष्टि रखती एक समान – बहार, पर्वत, नदी, नाला वह संजोकर रखती – समय-समय पर वर्षा बनकर स्वयं बरस पड़ती – पशु पक्षी जलचर नभचर सभी उसी की संतान
सभी को उसने जीने का अधिकार दिया एक समान...

Posted on: Jan 05, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIHARI

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