त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है, बीते पलों की याद दिलाती है...काव्य

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक मनकाव्य सुना रहा है:
आज गाँव शहर में चहल-पहल और पूर्णिमा है |आज रक्षाबंधन का दिन वर्ष में एक ही बार आता है |इस दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधकर भाई के लम्बी उम्र का कामना करती है |लडकियां नया पोशाग पहनकर इधर से उधर घूमते रहे हैं| जगह-जगह राखियों और साड़ियों का दूकान सजा है | बहन राखियां और मिठाइयां खरीद रहे हैं|भाई राखी के बदले पैसे और उनकी रक्षा के लिए आशीर्वाद देकर बहन का मन जीत लेता है |इसलिए त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है| क्योंकि यह बीते पलों की याद दिलाती है|

Posted on: May 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH

जितना मना लो नहीं मानता, दिल बड़ा स्वाभिमानी- कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
जितना मना लो नहीं मानता, दिल बड़ा स्वाभिमानी|
जो करना है कर लेता हैं, बेरोकटोक जो अपना ही मनमानी|
नहीं देखता सोचता आगे पीछे, बढ़ा ही वो नादानी|
चाहे जलना पड़ जाये उसको, पीछे नहीं वो हटता|
अपने ही बलबूते पर हरदम कोठता रहता|
मान सम्मान की नहीं फिकर, करना है जो काम...

Posted on: May 22, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

कुछ चुटकुले, कन्हैया लाल पड़ियारी द्वारा

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक चुटकुला सुना रहे हैं:
शाली जीजा से बोली- जीजाजी चलो कहीं से घूम कर आते हैं|
जीजा- घूमने वाला तोह घूम रहा, उसे आने दो|
.
जीजा शाली से बोला – चलो कही घूम कर आते हैं|
शाली- यहाँ सब घूमते है, घूमने वाला कोई नहीं|
...

Posted on: May 22, 2019. Tags: CG CHUTKULA KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH

कुछ-कुछ शोर शराबा था, कुछ-कुछ था शांति...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कुछ-कुछ शोर शराबा था, कुछ-कुछ था शांति-
शोर शराबा इसलिये था-
क्यों कि एक बुज़ुर्ग बेसहारा का निधन हो गया था-
शांति इसलिये था क्यों कि उसका कोई रोने वाला नहीं था-
उसके जान पहचान सगे संबंधी दूर के थे-
उन्हें बुला कर अंतिम संस्कार किया गया-
कहानी हुवा ख़तम, वह था एक संत...

Posted on: May 22, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

सो रही थी नन्ही सी जान, दुबक बीच के अन्दर...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सो रही थी नन्ही सी जान, दुबक बीच के अन्दर
पडी धरती मै ही, जाग उठी उसके अन्दर
खूब भीगी नहाई फूली, आ गई वो बाहर
पली बढ़ी जवान हुई, दिखने लगी वह सुन्दर
कलि बनी फूल बना, फुला फला एक सुन्दर
एक बीज आया एक बीज अपना जैसा , डाली उसके अंधार ...

Posted on: May 22, 2019. Tags: CG CHHATTISGARH KANHAIYALAL PADIYARI POEM

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