चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड-
अडबड तेंदू चार पके हवे, झन कर तय बिचार-
पान मुखारी तोड़ आन बो, बेटी के हवय सगाई-
पतरी दोना खील डार बो, अडबड हवय मंगाई-
बेटी के सगाई मा, आहीं लोग लुगाई-
ओकर खातीर कहाथो वो, झन कर तय ठागुवाई...

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

बड़ो का अपमान और बेकार का अहंकार नहीं करना चाहिये...कहानी-

एक समय की बात है कलिंग राज्य में मकरध्वज नाम का एक अहंकारी राजा राज्य करता था| उसका कोई संतान नहीं था| एक बार उसके राज्य में दुर्वासा ऋषि आये| उन्होंने अपने आने का संदेश राजा के पास भेजा| राजा अहंकार वस उसके स्वागत के लिए नही आया| दरबारी से बोला ऋषि से कहो महाराज बुला रहे हैं| दरवारी ने वैसा ही किया| ऋषि ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर राजा को श्राप दिया| दुष्ट राजन मैंने तुम्हे स्वागत के लिये संदेश भेजा, लेकिन तुम नहीं आये| मै श्राप देता हूँ, तुम्हारे राज्य में 12 वर्ष तक वर्षा नहीं होगी| ये सुनकर राजा को पछतावा हुआ| वह तुरंत ऋषि के पैर पकड़कर बोला ऋषिवर मुझसे भूल हुई, माफ़ करें| आपका श्राप वापस लें| ऋषि बोले धनुष से निकला बाण वापस तरकश में नही जाता| बहुत बार विनती करने पर ऋषि को उस पर दया आ गया| वे बोले अपने राज्य में यज्ञ करो, गरीबो को दान करो| इससे श्राप ख़त्म हो जायेगा| राजा ने वैसा ही किया और उसका राज्य श्राप मुक्त हो गया| इस तरह उसका अहंकार खत्म हो गया|

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी-
रंग बिरंगे फूल खिले हैं, कुदरत करती उनकी रखवाली-
हर मौसम में फूलता रहता, जमकर डाली-डाली-
तोड़कर ले जाता उनको, आकर बाग़ का माली-
रंग बिरंगे तितलियाँ आती, बाग़ की सुंदरता बढाने को-
मधुमक्खियां आती मधु चुराने को, भौरे होते गाने को...

Posted on: Jun 02, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

तू महलों कई रानी, मै गलियों का राजा...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
तू महलों कई रानी, मै गलियों का राजा-
तेरा-मेरा खूब जमेगा, चल बजवा लें लगन का बाजा-
तू बंगले की रानी होगी, मै संसद भवन का राजा-
आगे पीछे पुलिस की गाडी होगी, बीच में रानी-राजा-
घूमेंगे-फिरेंगे ऐश करेंगे, देश विदेश से होगा साझा-
रूस, अमेरिका, जापान, मलेशिया, सबका होगा साथ-
जो भो हो जरुर होगा हमारे पास...

Posted on: Jun 02, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

लड़की ही रसोई क्यों करे, बेटी में नहीं क्या जान...रचना-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे हैं :
लड़की ही रसोई क्यों करे, बेटी में नहीं क्या जान-
बेटा रसोई क्यों न करे, बेटा नहीं क्या इंसान-
बेटा ही तो मुकुट बांधकर जाता है बारात-
बेटी भी मुकुट बांधकर जाये लेकर बारात-
बेटा ही क्यों ले आता किसी पराई बेटी-
बेटी भी जाकर ले आये, माँ बाप का बेटा...

Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH RCHANA

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