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राजा मानिकचंद्र और उनकी पत्नी की कहानी...

बंगाल के राजा मानिकचंद्र की अनेक रानियां थी, किसी रानी से पुत्र नही हो रहा था फिर उसने यमराज की बहन मुक्ता से विवाह किया लेकिन उससे भी पुत्र नही हुआ, तब उसने उसे घर से निकाल घुडसार में रख दिया और प्रतिदिन आधा किलो चावल देने लगा, मुक्ता उस चावल में से भगवान को भोग लगाती थी, ब्राम्हणों को दान देती थी और बचा हुआ खुद खाती थी, एक दिन उसने एक विश्वासपात्र नौकर से अपने पिता के पास अपना हाल बताने संदेश भेजा, राजा रानी मुक्ता का हाल जानकर दुखी हुवे, और नौकर को धन देकर बोले ये बेटी को महल बनाने के लिए दे देना, फिर वह महल बनवाकर अच्छे से रहने लगी, एक दिन राजा वहां आया तो देखकर अचंभित रह गया, राजा के आने पर उसने स्वागत किया, अच्छा व्यवहार किया, सारी बात राजा के पूछने पर बताई, राजा खुश हुआ और रात वही ठहर गया, सुबह राजधानी आ गया, कुछ दिनों बाद मुक्ता गर्भवती हो गई, राजा उसे महल ले आया और पटरानी बनाया|

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

कुकरानो की कमी नहीं, हर पांच साल आते हैं...व्यंग्य रचना-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं :
कुकरानो की कमी नही हर पांच साल आते हैं-
हर पांच साल में नए-नए परवाने बनाते हैं-
हरी-हरी बंडल दिखाकर हमारे असमत धन छीन जाते हैं-
भोले भाले समझ नही पाते, उनकी चाल-
फंस जाते हैं देख, हरी-हरी नोटो का बंडल-
वादे कसमे भूलकर करते हैं मनमानी-
हम लोग भोले-भाले उनकी चाल कैसे जानी...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SATIRE

बकरी चराने वाले समारू और मंगलू उरांव की छत्तीसगढ़ी कहानी...

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं: चिर्रू नाम का एक उरांव रहता था, उसके दो बेटे थे जिसका नाम समारू और मंगलू जिसमे सम्हारु बहुत होशियार था, मंगलू होशियार नही था, चिर्रू खतम हो गया और उसके पत्नी वृद्ध हो गई घर के सभी जिम्मेदारी दोनों भाई के ऊपर आ गया| वे दोनों गाँव के बकरी चाराने लगे एक दिन समारू, मगलू से कहा जा रे बकरियों को चारा-चराकर ले आओ, वह थोड़ा चना रखा और चला गया मंझनिया के समय बकरियों को पानी पिला के और महुआ के छाया में सो गया, बकरी बैठ के चारा को पागुर ले रहे थे मंगलू अपने मन में विचार किया, ये बकरी मुझे लड़ने को कह रहे हैं, ये सोचकर जंगली पासा में सभी बकरियों के मार दिया सभी बकरी मर गये, और वे घर वापस अ गया समारू, मंगलू से पूछा बकरियाँ कहाँ हैं, बताया वो मुझे लड़ने के लिए चगली कर रहे थे तो मै उन्हें पासा से मार दिया, फिर मंगलू सोचा कि बकरी हमें नही छोड़ते और वह जाके सभी बकरी को भुदरा में ले जाके छुपा दिया और बकरियों के मालिकों को कह दिया सभी बकरियों को (बिग्वा) चीता खा गया, सभी लोग अपने-अपने बकरियों को खोजने गये, लेकिन एक भी नही पाए सभी मालिक चुपचाप रह गये, अर्थात ये कि व्यक्ति को हमेशा होशियार रहना चाहिए:

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है, समझौता करना ही पड़ता है...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं: पत्नी ने कहा पडोसी कैसा है मैने कहा अच्छा है- जब रात के अँधेरे में कांच के टुकड़े बिखेर देता है दरवाजे के बाहर पत्नी को समझा दिया हूँ- बच्चों को नंगे पैर निकलने नही देना- बूढी माँ पैर पर चप्पल पहनकर निकले- पडोसी के बच्चों से सम्मान स्नेह रखें- पत्नी को समझ दिया हूँ- पत्नी ने पूछा पडोसी कैसा है- मैंने कहा अच्छे हैं- छन्न से कांच के टुकड़े कि आवाज आई मैंने समझ गया पडोसी अच्छा नही है- पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है- समझौता करना ही पड़ता है: कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना...बाल कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं:
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर में आकर तुम बिल न बनाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम मेरे कपड़े को न कुतरना-
बड़ा महंगा पड़ता है फिर से उनको फिर सिलाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम कोठी के धान न खाना-
बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना-
बहार जो भी मिल्रे उसी को तुम खाना...

Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG CHILDREN KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

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