माया प्रीत के बंधना हवेगा बेटी के अंगना...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बेटियों पर एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं:
माया प्रीत के बंधना हवेगा, बेटी के अंगना-
बेटी हवे घर के सुआ, उड़ जाही मया के बंधना-
दाई दादा के दुलारी छोड़ जाही, अपन महतारी-
सास ससुर घर घुसिया, ननद देवर परोसी ले हो ही चिन्हारी-
लाज महत ला छाड़ी हो ही, घर घुसिया के पुछारी-
भूल जाहि दाई दादा भाई, जम्मो के रही वों दुलारी...

Posted on: Apr 24, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIHARI

बेटी के गहना ये क्या कहना...बेटियों पर कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बेटी का गहना शीर्षक से एक कविता सुना रहे है:
बेटी के गहना ये क्या कहना-
नाक म फूली नथनी-
आन म झलका गुना-
मुड म आवे गोरस के दहना-
बेटी के गहना के क्या कहना-
गोड म पैहरी पाँव म बिछिया...

Posted on: Apr 23, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIHARI

बिंद्रा के आगे तिहा, झाड़ जंगल मा चार तेंदू है, फलेंगे लता लता, मोर संगी हो...छत्तीसगढ़ी गीत

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी में एक गीत सुना रहे है:
बिंद्रा के आगे तिहा, झाड़ जंगल मा चार तेंदू है-
फलेंगे लता लता, मोर संगी हो-
मन मनावत है, होली दिवाली कसा तिहा-
हुदा हुदा, झुण्ड झुण्ड मा, डाल में बैठे है-
मेढकी के आरोपा के, अपन बात राखी सुणत है-
कोनो ला हो मन नहीं जरे, उकर हावे भी हड़बढ भी-
एको जनला मुसीबत आथे तो, जम्मो मिलकर करे फाड़ चिर...

Posted on: Apr 04, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIHARI

तोला बंदो ओ दाई तोला बंदो ओ...देवी वंदना

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक देवी वंदना सुना रहे हैं :
तोला बंदो ओ दाई तोला बंदो ओ-
तमनार के कारी बंदिन तोला बंदो ओ-
तमनार के भईया गोसाईन तोला बंदो ओ-
तमनार के निरोल गोड़ी तोला बंदो ओ-
करिया पटिहा चढ़ के आबे ,लाल पटिया लाबे ओ-
करिया पटिहा चढ़ के दाई केल-केल नारियाबे ओ...

Posted on: Mar 19, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIHARI

लालच नही करना चाहिए, जो हमारा है वो हमें किसी भी रूप में हो, मिल ही जाता है...कहानी

एक गाँव में तीन दोस्त थे एक मूर्तिकार दूसरा चित्रकार और तीसरा ब्राम्हण था ब्राहमण तंत्र-मंत्र में निपुण था, वे जिस जगह रहते थे, धंधा ठीक से नही चलने के कारण उन्होंने दूसरे जगह जाने का सोचा और जगह छोड़कर जाने लगे, जाते हुए तीनो एक शहर में रुके, वहां चोर-लुटेरे बहुत थे, इसलिए तीनो ने 4-4 घंटा जागकर रात बिताने का तय किया, पहले मूर्तिकार ने पहरा दिया, फिर चित्रकार ने उसके बाद ब्राहमण ने, मूर्तिकार सोचा क्यों ना काम किया जाय और एक सुंदर मूर्ति बनाया, जब चित्रकार की बारी आई तो उसने रंगकर उसे और सुंदर बना दिया, उसके बाद ब्राम्हण ने अपने मंत्र विद्या से उसे जीवित कर दिया, जिससे मूर्ति एक सुंदर कन्या में परिवर्तित हो, लेकिन अब तीनो में उसे पाने को लेकर विवाद होने लगा, तब तीनो एक न्यायाधीश के पास पहुंचे और अपनी समस्या बताई न्यायाधीश ने कहा गढ़ने वाला तो माता-पिता होता है, जीवन देने वाला भगवान होता है, और सजाने वाला पति होता है इसलिए कन्या सजाने वाले को मिलना चाहिए|इससे हमें सीख मिलती है किसी चीज का लालच नही करना चाहिए, जो हमारा है वो हमें ही मिलता है चाहे वो किसी भी रूप में हो| कन्हैयालाल पडिहारी@9981622548.

Posted on: Mar 13, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIHARI

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