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देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक गीत सुना रहे है:
देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही-
घारा बनाथ है डारा मा, ओला वह कइसन भुलाई संगी-
नान्नचुन, नान्नचुन लईका हवे, ओमन ला पानी चारा खवाई-
माई ला देखते पीला मन घलो, अपन जेना ला हालात है-
माई घलो पीला के खातिर, अपन बैना ला फैलात है-
अपन बैना ला फ़ैला के संगी, पन मया प्रीत ला जतात है-
देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही...

Posted on: Jun 13, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

नन्ही-नन्ही बूंदे बनकर, आसमान में तू छाई...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी कविता सुना रहे है:
नन्ही-नन्ही बूंदे बनकर,आसमान में तू छाई-
रिमझिम-रिमझिम बरसकर, धरती को तूने नहलाई-
बारम्बार वर्षा बनकर, धरती की प्यास बुझाई-
धरती माँ की प्यास बुझाकर, नदी नाला तूने बहाई-
धरती में हरियाली लाकर, सबका भूख प्यास मिटाई-
तू हितकारी उपकारी, तू धरती की महतारी-
तेरी दया से सब कुछ मिलता, धरती सबका है महतारी...

Posted on: May 18, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही का जोड़ी...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही कावो जोड़ी-
उर्रा धुर्रा मा रुक राही, के होअत है कटाई-
मनखे मनखे कन्हो, कथो नही है समाई-
झाड़ जंगल ह, धीरे धीरे होअत है, चाप्टर-
बाघ, भालू जनावर के नही है, कोई पावर-
झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही कावो जोड़ी...

Posted on: May 03, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

डोकरी दाई हर गोबर बिन हान के, छेना ला थोपत है...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयार एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
डोकरी दाई हर गोबर बिन हान के, छेना ला थोपत है-
छेना ला थोपत-थोपत, मन में मन मा गुणत है-
मैं घलो पढ़े रहते तो कोनो ऑफिस मा, बड़े अफसर डॉक्टर बने रहते-
उंच कुर्सी में बैठ के, हुकुम ला मै घलो बजात है-
मोर हवे फूटा करम, ओखर खातिर गोबर मा मै सनाय हूँ-
आगू पिछु जम्मो ला सोच के, अपन चोला ला धधाय़ हूँ...

Posted on: May 02, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

सुंदर-सुंदर प्यारी प्यारी, देखो इस धरती की क्यारी...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
सुंदर-सुंदर प्यारी प्यारी, देखो इस धरती की क्यारी-
किसी में उगता धान गेंहू, उसी की करो रखवारी-
किसी में उगता चना उड़द, कहीं उगता मूंगफली दाना-
आलू प्याज लहसून कांदा, धरती माता का सुंदर गहना-
कहीं कहीं मौसम्बी आम, अमरूद का बगीचा-
सेंव अंगूर कहीं कहीं, केला और पपीता-
गन्ना भुट्टा रक्सी का, धरती पर है भरमार...

Posted on: May 01, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

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