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मच्छर दादा मच्छर दादा मेरे घर तुम ना आना...बाल कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं:
मच्छर दादा मच्छर दादा मेरे घर तुम ना आना-
मेरे घर में आकर तुम अपना सुई ना चुभाना-
बड़ा दर्द होता हैं पड़ता है खुजलाना-
लाते हो तुम मलेरिया हैजा सभी ने यही हैं जाना-
तुम चुपके- चुपके आकर कानों में ना भुनभुनाना-
तुम आकर काटते हो तो पड़ता हैं अस्पताल जाना...

Posted on: Sep 07, 2018. Tags: CG CHILDREN KANHAIYALAL PADHIYARI POEM RAIGARH

किसीम-किसीम के नवा-नवा धान आगे, ओला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण-
सचाई गुरमटिया बाशा भोर कि जमो ला लागिस रोग-
दुबराज भाढा दुबराज लक्ष्मी येमन ला छोड़ीन आज के लोग-
सफरी भाढा सफरी जो फुल ओला हम गहन भूल-
तुलसी फुल तुलसी मंजरी गुरमटिया ओहर कहा चल गिस यार-
बुढा बूढी कूड़ा खीरा साग ओला होगिस मलेरिया बुखार-
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण...

Posted on: Aug 18, 2018. Tags: CHHATTISGARHI POEM KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH CG

देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक गीत सुना रहे है:
देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही-
घारा बनाथ है डारा मा, ओला वह कइसन भुलाई संगी-
नान्नचुन, नान्नचुन लईका हवे, ओमन ला पानी चारा खवाई-
माई ला देखते पीला मन घलो, अपन जेना ला हालात है-
माई घलो पीला के खातिर, अपन बैना ला फैलात है-
अपन बैना ला फ़ैला के संगी, पन मया प्रीत ला जतात है-
देख तो गा संगी चिराई हर, कइसन करत है आवा जाही...

Posted on: Jun 13, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

नन्ही-नन्ही बूंदे बनकर, आसमान में तू छाई...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी कविता सुना रहे है:
नन्ही-नन्ही बूंदे बनकर,आसमान में तू छाई-
रिमझिम-रिमझिम बरसकर, धरती को तूने नहलाई-
बारम्बार वर्षा बनकर, धरती की प्यास बुझाई-
धरती माँ की प्यास बुझाकर, नदी नाला तूने बहाई-
धरती में हरियाली लाकर, सबका भूख प्यास मिटाई-
तू हितकारी उपकारी, तू धरती की महतारी-
तेरी दया से सब कुछ मिलता, धरती सबका है महतारी...

Posted on: May 18, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही का जोड़ी...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही कावो जोड़ी-
उर्रा धुर्रा मा रुक राही, के होअत है कटाई-
मनखे मनखे कन्हो, कथो नही है समाई-
झाड़ जंगल ह, धीरे धीरे होअत है, चाप्टर-
बाघ, भालू जनावर के नही है, कोई पावर-
झाड़ जंगल ह गाँव शहर मा, बदल जाही कावो जोड़ी...

Posted on: May 03, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

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