नेताओं की गोद में खेल रहा, मेरा भारत महान...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
नेताओं की गोद में खेल रहा, मेरा भारत महान-
जनता मूर्ख जानकर भी कर रहा उनका दोष का सम्मान-
खून की होली खेल रहे, हो रहा कत्ले आम-
चीर हरण हो रहा यहां देखो यहां खुले आम-
देश की अमानत पूंजी लोग ले भाग रहे-
उद्योगपति बेईमान, सरकार सो रहा यहां बिस्तर तान...

Posted on: Mar 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADHIYARI POEM RAIGARH

मुझे कृष्ण रंग है प्यारा, मुझे श्याम रंग ने दुलारा...होली गीत-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक होली गीत सुना रहे हैं:
मुझे कृष्ण रंग है प्यारा, मुझे श्याम रंग ने दुलारा-
बोलो कृष्ण रंग की होली, मरो प्रेम रंग पिचकारी-
भर लो प्रेम प्यार से झोली, बोलो प्रेम प्यार की बोली-
मुझे कृष्ण रंग है प्यरा, मुझे श्याम रंग ने दुलारा-
भर लो प्रेम प्यार से झोली, बोलो प्रेम प्यार की बोली...

Posted on: Mar 10, 2019. Tags: CG HOLI KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH SONG

मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन जाया रे...होली गीत-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक होली गीत सुना रहे हैं:
मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन जाया रे-
कोई कहे नंदलाल, कोई कहे मुरली वाला-
कोई कहे धरो धरो, कोई कहे बांध डारो-
कोई कहे मधुवाला, कोई कहे गोपाला-
कोई कहे दधि चोर, कोई कहे माखन चोर...

Posted on: Mar 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH SONG

मोर हीरा भुइयां, मोर सोना भुइयां, मोर उपजाऊ भुइयां...किसान गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगड़ (छत्तीसगढ) से कन्हैयालाल पडियारी धरती माता पर एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
मोर हीरा भुइयां, मोर सोना भुइयां, मोर उपजाऊ भुइयां – तै कहां पर आ गे – कागद के नोट खातिर, दलाल मन के चोट खातिर-
तै बेचा गे – तै मोला छोड़ कहा पर आ गे, तै हर छोटे कागद के नोट छोडी-
कवडी-कवडी खातिर मै लला गे – मोर उपजाऊ भुइयां छोड़ कहा पर आ गे –
तोर छाती मा चिमनी गाड़े, वहा ले करिया कुहिरा निकाले-
मोर छाती मा आरी चल गे – बिर्ला शासन प्रशासन के आखी मा खटके, मोर चोला ले तै लुटा गये-
मोर करेजा मा खंजर गडगे – मन-मन मा खोजत रह गये, तोला गुन -गुन रोवत रह गे – तोर छोड़े मा बैठ गये आंगर- जांगर-
मोर उपजाऊ भुईया छोड़ कहा पर आ गे...

Posted on: Sep 28, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

नित-नित जीना, नित-नित मरना सबकी यही कहानी है...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
नित-नित जीना, नित-नित मरना सबकी यही कहानी है-
ढोल मृदंग से सूर्य निकलता मै भी कभी अभिमानी था-
अब देखो मेरा बुरा हाल रोज तुम्ही से खूब पिटता हूँ-
पिटा-पिटाकर भी तुमसे तुम्हारा मन बहलाता हूँ-
तुम गाते हो सुर लगाकर मई भीतर-भीतर रोता हूँ-
मै भी था कभी तुम जैसा जिन्दा-
अब तो ढोल मृदंग कहलाता हूँ-
करो न गुमान तुम भी मुझ जैसा...

Posted on: Sep 15, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI

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