पसीना बहाबो कनिहा तोड़बो, आगु आगु ला करबो बुता काम...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे है:
देख तो गा समारोह खेत खार मा, बंद कचरा हत कैसन जामे है-
निंदाई गुड़ाई नहीं करबो त, खेत जाखो ला साने हे-
अइसन में कइसन धान होई, धान गच ल डाते है-
खेती हमर जिन्दगी आय, खेती हमर जिन्दगी आय झोख करबो बने देख रे-
एक मोटा अगर पाबो, जब चलाबो अपन जांगर-
पसीना बहाबो कनिहा तोड़बो, आगु आगु ला करबो बुता काम-
कोठी मा भरे रहे हमर, किस्म-किस्म के जम्मो धान...

Posted on: May 05, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYAARI

लोगो के पास रहने के लिए झोपड़ा नही, पर कितने बिल्डिंग खंडहर हो रहे...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे है:
लोगो के पास रहने के लिए, झोपड़ा नही, पर कितने बिल्डिंग, खंडहर हो रहे-
लोगो को खाने को नही मिल रहा, पर कितना खाना कूड़े में, फेक दिया जाता-
लोगो को पीने को पानी नही मिल रहा, पर कितना पानी गटर नाली में बहाया जाता है-
लोगो को पहनने को कपड़ा नही मिलता, पर कितने कपड़े कूड़े दान में फेका जाता है-
धनवान मौज मस्ती कर रहा है, पर निर्धन मन अफ़सोस कर रह जाता है-
इन पर शासन का ध्यान, क्यों नही जाता...

Posted on: May 04, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYAARI

दादी अम्मा, दादी अम्मा, हमको ये बताना...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियार एक कविता सुना रहे है:
दादी अम्मा, दादी अम्मा, हमको ये बताओ ना-
दादा तुमको कैसे पटाया, हमको वो बतलाओं ना-
दादी बोली चल नटखट, हमको तुम सताओ ना-
दादा तुम्हारा लट्टू था हम पर, पट गया हमसे वो झटपट-
समझ गया मै तुम दोनों का, एक दूजे से करते थे बहुत प्यार-
झटपट दोनों की बात बन गई, न कर सके एक दूजे से इन्कार-
दादी बोली चुप शरारती, समझ गई तेरा लाड़ दुलार...

Posted on: May 03, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYAARI

कोयला के खातिर जाहि प्राण, कोयला ले निकाले के खातिर सरकार के हवे प्लान...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे है:
कोयला के खातिर जाहि प्राण, कोयला ले निकाले के खातिर सरकार के हवे प्लान-
रेलवे लाईन बिछावत हवे, किसान मन के लूट के भूईय्या कंपनी मन के मितान हवे-
कहा पाओं खेतिहर भूईय्या, झाड़ जंगल ल घलो करवावत हवे सफ़ाया-
नदी नरवा के पानी उखरेज खातिर, उमा नहीं है कौनो सुनैय्या-
कहां जाबो कहां रहिबो, करवावत हवे जन सुनवाई-
करवा के हमन किसान मन कार्यवाहीं, देखों भाई हमर सरकार ल कम्पनी की
करत है हवे भलाई...

Posted on: Apr 22, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYAARI

हमन ग़रीबा किसान का करबो, खेत ख़ार बिन भूखा मरबो...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे है:
लूटत हवे, लूटत हवे जी, खेत ख़ार हमर लूटत, हवे जी-
हमन ग़रीबा किसान का करबो, खेत ख़ार बिन भूखा मरबो-
जेवला कमावत खावत रहेन, जेवला ख़ाके पलत रहेन-
वो हर आखिये धुरिया जावत हवे, आखी मा निंदिया नही आवत हवे-
सरकार की आँख मा गढ़त हवे, ओखर खातिर हमन तोटाला चिपत हवे-
आनी बाहर ले कम्पनी कारखाना, लोगन के होई आना जाना-
हमर यहाँ नहीं है समाना, देखों कैसों आवत है जमाना-
लूटत हवे, लूटत हवे, लूटत हवे जी...

Posted on: Apr 15, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYAARI

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