कंबल ओढ़े जाडा सिकुड़े, फिर भी निगोड़ा आग मांगे...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
कंबल ओढ़े जाडा सिकुड़े-
फिर भी निगोड़ा आग मागा – रूई की रजाई ओढ़-
तन का ताप मागा-
अल्लढता के लिहाफ ओढ़े-
तन-मन झाझोड़ डारे-
कम्बल कपडा साल गर्म-
सूरज का अघोष मागे...

Posted on: Jul 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADHIYARI POEM RAIGARH

सावन के महीना गर्मी करय बड़ा जोर...गीत-

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं :
सावन के महीना गर्मी करय बड़ा जोर-
दिन के सूरज रात तरईया चंदा करत है अंजोर-
कभुहूँ पुरवईया कबहू पक्षिम हवा आये-
कबहूँ कहूँ बादल निकले मन को लुभाये-
तेरा महिमा कोई न जाने, मरजी ऐ काहे तू-
मख्खी मच्छर कारण नीद भूख भागे-
पानी के बिना जग मा सूना-सूना लागे..

Posted on: Jul 21, 2019. Tags: ANUPPUR KANHAIYALAL KEWAT MP SONG

दिन के सूरज रात तरईया चंदा करत है अंजोर...गीत-

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं :
सावन के महीना गर्मी करय बड़ा जोर-
दिन के सूरज रात तरईया चंदा करत है अंजोर-
कभुहूँ पुरवईया कबहू पक्षिम हवा आये-
कबहूँ कहूँ बादल निकले मन को लुभाये-
तेरा महिमा कोई न जाने, मरजी ऐ काहे तू-
मख्खी मच्छर कारण नीद भूख भागे-
पानी के बिना जग मा सूना-सूना लागे..

Posted on: Jul 21, 2019. Tags: ANUPPUR KANHAIYALAL KEWAT MP SONG

गुरु बनाओ जान के सीखो ज्ञान विज्ञान के...कविता-

ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे हैं :
गुरु बनाओ जान के सीखो ज्ञान विज्ञान के-
संगीत है सुर और तान के-
सराहना होता है चरित्रवान के-
पानी पियो छान के सोना मच्छरदानी तान के-
रक्षा करो इंसान के, कभी काम करो अनुदान के...

Posted on: Jul 19, 2019. Tags: ANUPPUR CG KANHAIYALAL KEWAT MP POEM

गरीब का कहाँ पुछारी...कहानी-

गर्मी का दिन था| एक गरीब किसान रामू बिना जूते पहने और बिना पानी साथ रखे जरुरी काम के लिये घर से निकल पड़ा| रास्ता बड़ा दूर था| पेड़ का छाव तक नही था| समय के साथ धूप तेज हुई और धरती गर्म हो गई| रामू दौड़ाने लगा और थक गया| रास्ते में एक बबूल का पेड़ मिला| जिसके नीचे वह आराम किया और फिर से चलने लगा|शाम तक रामू पहुंच गया| वहां पहुचने पर उसके मामा बहुत खुश हुए| लेकिन मामी खुश नही हुई| उसके बाद उसकी मामी ने महमानों के लिये बिना मन का खाना बनाया| जो रामू को अच्छा नहीं लगा और वह दूसरे दिन चला गया| ये सब रामू के मामा को अच्छा नहीं लगा| उसने अपनी पत्नी को कहा तुमने ठीक नहीं किया| घर पहुंचकर रामू ने अपनी माँ को उस व्योहार के बारे में बताया| माँ बोली इसीलिए मै जाने से मना कर रही थी| इससे सीख मिलती है हमारे व्योहार से ही हमारी पहचान होती है| इसलिये सोच समझ कर काम करना चाहिए|

Posted on: Jul 19, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

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