जय सेवा-जय सेवा बोलो रे...गोंडी गीत

ग्राम-लामता, जिला-बालाघाट (म.प्र.) से ब्रजलाल टेकाम एक गोंडी गीत सुना रहे है, इस गीत में गोंडी भाषा की विशेषता के बारे में बताया गया है:
जय सेवा-जय सेवा बोलो रे-
जय सेवा-जय सेवा बोलो रे-
अनि वनका ते मावा गोंडी भाषा-
जय सेवा-जय सेवा इंटरो-
अनि वनका ते मावा गोंडी भाषा-
जय सेवा-जय सेवा इंटरो-
भैया जय-सेवा जय-सेवा इंटरो-
जय सेवा-जय सेवा सबतुन इन्दाना-
गोंडी धरम तुन हैय जो पुन्दाना-
जय सेवा-जय सेवा सबतुन इन्दाना-
गोंडी धरम तुन हैय जो पुन्दाना-
अनि गोंडी भाषा काक सब अंटरो-
अनि वनका ते मावा गोंडी भाषा-
जय सेवा-जय सेवा...
ब्रजलाल टेकाम@ 9685526118.

Posted on: Jul 25, 2018. Tags: BALAGHAT BRAJLAL TEKAM GONDI SONG

झिमिर-झिमिर पीर वाईता,ढोड़ा उषा वाता...गोंडी गीत-

ग्राम-लामता, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से ब्रजलाल टेकाम एक पारम्परिक गोंडी लोकगीत सुना रहे हैं. इस गीत गीत में जीजा अपनी शाली से हंसी-ठिठोली करते हुए गाने में कुछ कहना चाह रही है:
झिमिर-झिमिर पीर वाईता,ढोड़ा उषा वाता-
अन सांगो घुस्सूर बैसी, बोट्टे देहकी लाता-
नावा मामा ना टूरी वो, केंजा नवा गोंडी पाटा-
पुपुल दाड़ी, पुपुल दाड़ी, व्ईयो हिल्ले बाड़ी-
अनि अन सांगो, जल्दी-जल्दी छूटे मायल गाड़ी-
कनकी ता गाटो, चिरोटा ता भाजी-
अनि आलू भट्टा परो, सांगो-अरसिता गाजी-
ठेका ते ठेका अनि, तोड़ी ता ठेका-
ना संग दे ऐन्दिकी ते, पैसा नना सेका-
नावा मामा ना टूरी वो...
ब्रजलाल टेकाम@9685526118.

Posted on: Jul 22, 2018. Tags: BALAGHAT BRAJLAL TEKAM GONDI SONG

मरका पर्रो कांवा ना डेरा...गोंडी गीत-

ग्राम-लामता, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से ब्रजलाल टेकाम एक गोंडी गीत सुना रहे है । इस गीत के माध्यम से बताया गया है कि कौवा अपने बच्चों के लिए आम के पेड़ पर गोदा बनाता है, उसी पर निवास करता है और किस प्रकार से अपने बच्चो के लिए दाना चुन चुनकर लाता हैं तथा खिलाता है:
मरका पर्रो कांवा ना डेरा-
मरका पर्रो कांवा ना डेरा रो भाई-
मरका पर्रो कांवा ना डेरा-
मरका मडा ते गा, ताना हैई डेरा-
घास सनकाडी ता, बने किता घेरा-
अनी अगा ताना मंदा बसेरा रो भैया-
चुडू-चुडू चंव्वा, अनी चुडू-चुडू पूता-
चंव्वा नू तिह्ताता, वन्जी अनी कूता-
अनी मरका पर्रो ताना, बसेरा रो भैया-
वले-वले लख अन्ता, तिन्दाले गा दाना-
दिन अर्रे वाईता, ताना ठिकाना-
अनी मरका पर्रो ताना, बसेरा रो भैया-
मरका पर्रो कांवा ना डेरा-
मरका पर्रो कांवा ना...
ब्रजलाल टेकाम@9685526118.

Posted on: Jul 21, 2018. Tags: BALAGHAT BRAJLAL TEKAM GONDI SONG

वनांचल स्वर : पुराने ज़माने में जब धान कोदो पैदा नहीं होता था लोग महुआ आदि ही खाते थे...

ग्राम-पेंडारी, ब्लाक-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से ब्रेजलाल कुशवाह बता रहे है कि उनका गाँव जंगल के किनारे बसा हुआ है वहां से उनको जलाऊ लकड़ी मिलता है, आंवला, तेंदू, छार, बेलवा भी मिलती है पर्याप्त मात्रा में साल की लकड़ी मिलती है और उसके अलावा महुआ भी मिलता है उसका उपयोग दारु बनाने और उसको पीसकर लाटा बनाकर भी खाया जाता है और ढेकी से कूटकर लड्डू बनाकर सुखाया जाता है और फिर खाया जाता है| पुराने ज़माने जब धान कोदो पैदा नहीं होता था उस समय लोग महुआ खाकर जीवित रहते थे| महुआ का उपयोग आज भी किया जाता है. बाबूलाल नेटी@9669083404.

Posted on: Jun 07, 2018. Tags: BRIJLAL KUSHWAH VANANCHAL SWARA

हमारे गाँव में हाथी आते हैं, अधिकारी लिख कर ले जाते हैं पर अक्सर मुआवजा नहीं मिलता...

ग्राम-बोझा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सूरजलाल सिंह आयाम बता रहे हैं कि उनके गाँव के पास के सोनगरा और चंद्रपुर जंगल से उनके गाँव तक हाथियों का आवागमन लगा रहता है जिससे सभी ग्रामीण बहुत अधिक परेशान हैं गाँव के खेत में लगे फसल, घरों को आतंक फैलाते हुए हाथी एक जंगल से दूसरे जंगल में जाते हैं जंगल से जैसे वे गाँव में प्रवेश होते हैं सिपाही लाउड स्पीकर से बोलकर बता देते हैं कि घर से बाहर कोई न निकलें, लिखकर ले जाते हैं पर फसलों का नुकसान का मुआवजा भी सरकार नही देती है जिससे उन्हें अपने आर्थिक स्थिति से बहुत परेशानी होती है.सूरजलाल आयम@9165442591.

Posted on: Apr 23, 2018. Tags: SURAJLAL AYAM

View Older Reports »

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download