केले की हुई है सगाई, शकरकंद नाचने को आई...बाल गीत

ग्राम-किलेपार, तहसील-चारामा, जिला-कांकेर, छत्तीसगढ़ से होमेन्द्र कुमार जी एक बाल गीत प्रस्तुत कर रहे हैं :
केले की हुई है सगाई, शकरकंद नाचने को आई-
मूली बेचारी ने खंभे लगाई, खंभे लगाई जी-
खंभे लगाई, मूली बेचारी ने खंभे लगाईं – गोभी ने तम्बू लगाई, शकरकंद नाचने को आई – केले की हुई...
कुनुरू बेचारी ने झालर लगाई, झालर लगाई जी –
झालर लगाई, कुनुरू बेचारी ने झालर लगाई – आलू ने ढोलक बजाई, शकरकंद नाचने को आई – केले की हुई...
कद्दू बेचारी का लल्ला हुआ है, लल्ला हुआ है जी – लल्ला हुआ है, कद्दू बेचारी का लल्ला हुआ है – लौकी को मिली है बधाई, शकरकंद नाचने को आई – केले की हुई...

Posted on: Jan 13, 2015. Tags: Homendra Kumar

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