हर बस्ती कर दी गयी है पाट-पाट...प्रेमचंद जयन्ती पर कवितापाठ

हैपी कुमार, भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मुजफ्फरपुर (बिहार) से प्रेमचंद जयन्ती के अवसर पर आयोजित समारोह में आए कवि श्रवण कुमार से प्रेमचंद के साहित्यिक सफ़र के बारे में बात की. साथी श्रवण ने इस अवसर पर एक कविता भी सुनाई:
हर बस्ती कर दी गयी है पाट-पाट
खाटें भी गयी हैं टूट
बिछावन भी हो गए तार-तार
हारे हुए चेहरों पर, लटकी हुई झुर्रियां हैं बेज़ार
जमुनी काकी, धरती माँ की ममता का कुमकुम कचनार
टीबी खांसी से लाचार
देख चूल्हा-चौका सूना
तड़प उठती है बार-बार
कि आखिर कौन ले गया, खून-पसीने भरी कमाई
माँ को भूल न पाया रमुआ
लुट गयी खेती फसल बटाई
किसने छीनी मेहनत उसकी
अपनी कोठी-कार सजाई
सपने राख हुए जल-जल के
जीवन पतझड़ जैसा सूना
रजधानी दुल्हन सी सजती
आज़ादी का यही नमूना

Posted on: Aug 03, 2014. Tags: Happy Kumar

बसंती बहार बहल सरसो फुलाइल, ए भइया चला मतदान करी...

बसंती बहार बहल सरसो फुलाइल
ए भइया चली मतदान करी
ए भौजी चलीं मतदान करी
ईहे समय बा देश के भाग बनावे के ए भइया चली.....
आपन लोग के बोटवा देश के भाग्य बनी
मोझा पकुर के जनता चलके मतदान करी
बसंती बहार बहल सरसों फुलाइल
ए माई चली मतदान करी
इहे समय चुक जैवा देश बरबाद होंई
ए बाबु चला मतदान करी
चाला ए बहिनी तूहो संगै चला,
खाना-पीना छोर के मतदान करी
पांच साल पर देश के होला निरमान होइ
बसंती बहार बहल सरसों फुलाइल
ए भइया चली मतदान करीं

Posted on: Apr 30, 2014. Tags: Happy Kumar

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