केसवा मधवा सिखा नाव तोरे गोडवा...मराठी किसान गीत-

ग्राम-सालभट्टी, विकासखण्ड-मानपुर, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से कृष्णा देशमुख एक मराठी गीत सुना रहे हैं, किसानों द्वारा खेती करते समय ये गीत गाया जाता है:
केसवा मधवा सिखा नाव तोरे गोडवा-
पूजा सडका तू जे देवा...

Posted on: Apr 14, 2017. Tags: GHANSHYAM MARSAKOLE

ये वक्त न ठहरा है ये वक्त न ठहरेगा...देशभक्ति गीत

ग्राम-घाटकोहका, पोस्ट-सुंदरिया, थाना-कुरई, जिला-सिवनी (म.प्र.) से घनश्याम मर्सकोले एक देशभक्ति गीत सुना रहे है:
ये वक्त न ठेहरा है ये वक्त न ठहरेगा-
दिन यूही गुजर जाएगा घबराना कैसा हैं-
हिम्मत से काम लेंगे घबराना कैसा है-
ये दुःख जीवन में आते और जाते रहते है-
दुःख पहले आएगा घबराना कैसा है...

Posted on: Oct 17, 2016. Tags: GHANSHYAM MARSAKOLE

Wilt disease in my Gram crop has also affected vegetable crops, Please help...

Ghanshyam is talking to a farmer Suresh Patel in Kamthi village in Pandaria block of Kabirdham district who tells him that his Gram crop is affected by Ukta (wilt) disease. As advised by Village Agriculture officer he treated it with medicine which helped a bit but now his vegetable crop is also affected by the same disease. Agriculture officer took his soil for testing but he is still waiting for result. He requests us to advise and also call Block Agriculture officer@9424279747 to help him. Ghanshyam@9479003195

Posted on: Feb 29, 2016. Tags: GHANSHYAM MARSAKOLE

मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन पापा थरथर कांपल हे... सरगुजिया विवाह गीत

ग्राम-बलोर, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से एक ग्रामीण महिला सरगुजिया भाषा में एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं, यह गीत विवाह के समय गाया जाता है:
मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन पापा थरथर कांपल हे-
हथवा लगावल दुलहा अनजान दुलहा अवदा निहामण हे-
धीरे रहु हे बाबू धीरे रहु और गम्भीरे रहु ना-
जब पापा कुशल संकल जन करिहें तब गनिराउर हे-
मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन बेटी थरथर कांपल हे...

Posted on: Dec 22, 2015. Tags: GHANSHYAM MARSAKOLE

नीमिया पतइया झरि जाला, अंगनवां कइसे बहारूं जी...विवाह गीत

ग्राम-संतोषी नगर, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से कुछ छात्राएं एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं, गीत का सन्दर्भ यह है कि घर में नई-नवेली बहू नीम के पत्तों, कचरों से अनुरोध करती है कि जेठजी सामने बैठे हैं कृपया आँगन में मत आओ, मुझे बहारने में दिक्कत होगी:
नीमिया पतइया झरि जाला, अंगनवां कइसे बहारूं जी-
ओहि रे अंगनवां में ससुरजी के डेरा-
घुंघटा कढ़त दिन जाला, अंगनवां कइसे बहारूं जी-
ओहि रे अंगनवां में भसुरजी के डेरा-
घुंघटा कढ़त दिन जाला, अंगनवां कइसे बहारूं जी...

Posted on: Dec 18, 2015. Tags: GHANSHYAM MARSAKOLE

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