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मुझको ऊँची मिले हवेली, या मिल जाए राजमहल...माखनलाल चतुर्वेदी की कविता

ग्राम-बरोतीकला, तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुशवाह जो 9 वी कक्षा का छात्र है माखनलाल चतुर्वेदी की एक कविता सुना रहे है:
मुझको ऊँची मिले हवेली, या मिल जाए राजमहल-
छप्पर की कुटियाँ हो चाहे, पेड़ो की छाया शीतल-
मेरे घर यह नहीं बनेंगे, चाहे हों कितने सुन्दर-
मेरी माँ जिस जगह रहेगी, वहीं बनेगा मेरा घर-
मुझको ऊँची मिले हवेली, या मिल जाए राजमहल-
छप्पर की कुटियाँ हो चाहे, पेड़ो की छाया शीतल...

Posted on: Apr 15, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSHWAHA

के तोहरा संग जाइ भँवरवा, के तोहरा संग जाइ...भजन

ग्राम-बरेतीकला, पोस्ट-अमगंवा, थाना-पनमार, ब्लाक,तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुशवाहा एक भजन गीत सुना रहे हैं :
के तोहरा संग जाइ भँवरवा, के तोहरा संग जाइ-
आवत के बेरिया सब केऊ जाने, घर घर बजत बधाई-
जाती के बेरिया कोउ ना जाने, हंस कहां उड़ जाइ-
के तोहरा संग जाइ भँवरवा, के तोहरा संग जाइ...

Posted on: Mar 11, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSHWAHA

तोरा मन दर्पण कहलाये, भरे बुरे सारे कर्मो को...भजन गीत

ग्राम-बरतीकला, थाना-पनमार, ब्लाक, तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुशवाहा एक भजन गीत सुना रहे हैं :
तोरा मन दर्पण कहलाये, भरे बुरे सारे कर्मो को-
देखे और दिखाए-
मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा ना कोए-
मन उजियारा जब-जब फैले जग उजियारा होय-
इस उजले दर्पण पर प्राणी धुल ना जमने पाय-
सुख की कलियां दुःख के कांटे मन सब का आधार...

Posted on: Mar 07, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSHWAHA

जल भरें हिलोर-हिलोर रेशम की डोरी...बघेली लोक गीत -

जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) नेत्रहीन विद्यालय के कक्षा-नौ के छात्र दयासागर कुशवाहा बघेली भाषा में एक लोकगीत सुना रहे हैं:
जल भरें हिलोर-हिलोर रेशम की डोरी-
रेशम डोरी जब निख लागे-
जब कोरा बालकबा होई रेशम की डोरी-
सोने घइलना जब निख लागे-
जब पातर धनिया होई रेशम की डोरी-
जल भरें हिलोर-हिलोर रेशम की डोरी...

Posted on: Mar 05, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSHWAHA

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो, तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो...देश भक्ति गीत

जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुशवाहा होली की शुभकामनाएं देते हुए एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं :
तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो, तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो-
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो-
तुम्ही हो सांथी तुम्ही सहारे, कोई ना अपना सिवा तुम्हारे-
तुम्ही हो नईया, तुम्ही खेवईया-
जो खिल सके ना वो फूल हम हैं-
तुहारे चरणों की धूल हम हैं...

Posted on: Mar 03, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSHWAHA

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