आदिवासी समुदाय में कुल देवी देवताओ की पूजा में पूरा गाँव शामिल होता है...

ग्राम-कसनार, विकासखण्ड-दरभा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से सहदेव सिंह बघेल बता रहे हैं| उनके गाँव में देवी-देवतओं के पूजा का कार्यक्रम हो रहा है| ये पूजा में गाँव के सभी लोग और उनके रिस्तेदार शामिल होते हैं| पूजा के समय वो मुर्गी, बकरी और सुवर चढाते हैं | ये उनके कुल के देवी देवतओं कई पूजा है| जिसमे सभी को शामिल होना होता है|

Posted on: Jul 03, 2019. Tags: BASTAR BHOLA BAGHEL CG CULTURE DARBAH STORY

मौसम अच्छा रहने पर पर्याप्त उपज मिल जाता है...किसान अजय चंद्राकर-

कोदवा, जिला-बेमेतरा (छत्तीसगढ़) से अजय कुमार चंद्राकर बता रहे हैं| वे खेती का काम करते हैं| अभी वे खेती की तैयारी में लगे हैं| मौषम का इंतजार कर हैं| खेती में धान, गेंहू, सोयाबीन, अरहर, उड़द उगाते | दस एकड़ में खेती करते हैं| पहले सोयाबीन की बुवाई करते है, उसके बाद धान का बीज लगाते हैं| सब कुछ अच्छा होने पर 7 से 8 क्विंटल तक सोयाबीन का उत्पादन हो जाता है| और मुगफली 20 से 30 बोरी तक उत्पादन हो जाता है| संपर्क नंबर@9131081484.

Posted on: Jun 18, 2019. Tags: AGRICULTURE BEMETARA CG TIRATHRAM SAHU

तेलंगाना में आदिवासी समुदाय खेती से पहले बीजा त्योहार मनाते हैं...

ग्राम-कोटुल, जिला-भद्रादी कोठागुडम (तेलंगाना) से भोला बघेल ग्रामवासियों के साथ चर्चा कर रहे हैं| वे बता रहे हैं| गांव में बीजा त्योहार मनाया जा रहा है| जिसमे महिलायें राह चलते लोगो को रोककर टीका लगाते हैं, और जाने वाले लोग उन्हें कुछ रुपये देते हैं| इसे माठी त्योहार के नाम से भी जाना जाता है| इसके बाद ही वे खेती का काम शुरु करते हैं| त्योहार में महिलायें सामूहिक गीत गाते हैं|

Posted on: Jun 10, 2019. Tags: BHADRADI KOTHAGUDAM BHOLA BAGHEL CULTURE SONG TELANGANA

अक्षय तृतीया के दिन महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करते है-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी बता रहे हैं| आज अक्षय तृतीया है| आज का दिन किसान के लिये बड़ा ख़ास होता है| किसान अपने खेती के साधनो का पूजा करता है| महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करता है| अच्छा फसल होने की कामना करते है| वट वृक्ष पर धागा बांधकर पति की रक्षा की कामना करते हैं | इस समय विवाह का अच्छा मुहूर्त रहता है|

Posted on: May 07, 2019. Tags: CG CULTURE KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को ही अक्षय तृतीया कहते हैं-

सेतगंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी अक्षय तृतीय महापर्व के बारे में बता रहे हैं | हिदू संस्कृति में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है| ये नई प्रेरणा और स्फूर्ति का सृजन करते हैं| वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को ही अक्षय तृतीया कहते हैं। अक्षय का शाब्दिक अर्थ हैं| जिसका कभी क्षय न हो| यह माह गर्मी का होता है, और माना जाता है अक्षय तृतीया के दिन दिया गया, दान कभी नष्ट नहीं होता। उसका फल आपको इस जन्म के साथ-साथ कई जन्मों तक मिलता रहता है।

Posted on: May 03, 2019. Tags: CG CULTURE MUNGELI RAMAKANT SONI

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