माटी तिहार और अन्य त्यौहार के बारे में बता रहे है...

ग्राम-बड़े किलेपाल (पुजारी पारा),तहसील-बास्तानार,जिला-बस्तर,राज्य-छत्तीसगढ़ से बुधराम ताती के साथ पायको जी माटी त्यौहार(विज्जा-पंडूम) बारे में बता रहे है कि हमारे पूर्व से चलते आ रहे रीती-रिवाज के अनुसार मनाते है और इसमें आम,चार,धान, खुट्की, महुआ तथा सूअर,मुर्गा को बली के रूप में देते है इसके बाद अपने घर कि पूजा किया जाता है और अपने-अपने देवी देवता को पूजा करते है इसके बाद हरियाली,नया खाई,दिवाली,दशहरा,चाहुर-धोनी आदि हमारे आदिवासी लोग मनाते है,सम्पर्क नम्बर 7587335975,ID(182718)

Posted on: Jan 13, 2021. Tags: BASTAR CG CULTURAL STORY

अपने गाँव के संस्कृति की कहानी...

ग्राम-गोरियापाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से विकास पोड़ियामी अपनी गाँव की देवी देवता और संस्कृति के बारे बता रहे है कि गोरियापाल के लोग अलग-अलग दर्जे के देवी देवता को मानते है और भिन-भिन वंश परम्परा से व काल खंड अनुसार प्राकृतिक परिवेशीय से घटित घटना से देवी देवता का नामकरण भी अलग-अलग हुआ,देवी- देवताओं को खुश करने के लिए जानवरों की बलि देते हैं ताकि वे प्राकृतिक व देवीय आपदा से सुरक्षित रहे,और गाँव में ऋतु के अनुसार त्यौहार मनाये जाते हैं| सम्पर्क नम्बर 8103481510, ID(182842) DW

Posted on: Jan 11, 2021. Tags: BASTAR CG CULTURAL STORY

एक गाँव की कहानी...

ग्राम-मुतनपाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से गोपीराम पोयाम गाँव की कहानी बता रहे है कि गाँव में पहले मुचाकी समुदाय के लोग आये है, बाद में पोयाम समुदाय के लोग आये, जब गाँव में तीन-चार घर थे तब से गाँव में रह रहे है उस समय सड़क न गाड़ी-घोड़ा कुछ भी नही थी, उस समय पैदल ही कहीं आना जाना जैसे गीदम,बास्तानार,जगदलपुर पैदल जाना पड़ता था, उस समय कृषि के सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो वे ज्यादातर जंगल से ही पेड़ पत्ती,फल-फुल,कंदमूल आदि खाकर जीवन यापन करते थे,और उस ज़माने में आम तोड़ने,खाने जंगल जाने पर आदमी चोरो और के होने का डर का दहशत फैला रहता था और आज के ज़माने में नक्सलियो का दहशत बना हुआ है|सम्पर्क नम्बर @9406344921, ID(176356) D

Posted on: Jan 11, 2021. Tags: BASTAR CG CULTURAL STORY

हाले ओ नानों केला ओ नानों...गोंडी गीत-

ग्राम-बड़े किलेपाल, ब्लॉक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से कुमार बाई एक गोंडी गीत सुना रहीं हैं:
हाले ओ नानों केला ओ नानों-
वेया वे सेलवा वे नानों-
अमुड़ो नानों वेया वे-
हाले ओ नानों केला ओ नानों...

Posted on: Jan 05, 2021. Tags: BASTAR CG CULTURAL GONDI SONG KUMAR BAI

पत्थर की छत के विशेषता के बारे में जानकारी...

पुजारी पारा, ग्राम-गुडिया, पंचायत-चितलगुर, ब्लाक-जगदलपुर, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से राजू राणा बोल रहे है कि अभी वे पुजारी पारा में है, और वहां पर जो घर के ऊपर जो छत बनाया जाता है वो ज्यादातर कपरा या अल्वेस्टर का उपयोग किया जाता है | लेकिन वहां पर पत्थर का छत है उसके बारे में दयारू नाग बता रहे है कि पत्थर का छत से पानी नीचे नहीं छूता है | तूफान आने से पत्थर के वजन के कारण तूफान भी उसको उठा नहीं पायेगा | इससे सुरक्षा और किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा | यह मरेंगा रामचरगीपाल से लाते है. दयारू नाग@7489978221.

Posted on: Jul 20, 2020. Tags: BASTAR CG CULTURAL DAYARU NAG RAJU RANA

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