शासन ये सब चला रहे हैं, गाँधी जी के नारों से...लॉकडाउन पर कविता-

दिल्ली से राजेश पाठक लॉकडाउन के समय होने वाली समस्या को बताते हुये, कविता के माध्यम से संदेश दे रहे हैं :
शासन ये सब चला रहे हैं, गाँधी जी के नारों से-
मदिरा की बू आती है, शंकर की दीवारों से-
इस देश में गंगा बहती है, इस देश के पत्ते सूखे क्यों-
यह देश है वीर जवानों का, इस देश के बच्चे भूखे क्यों-
मालिक हो या मजदूर का बच्चा-
सबको शिक्षा एक समान...

Posted on: May 24, 2020. Tags: CORONA POEM DELHI POEM RAJESH PATHAK

कोरोना का है कहना, शराबी होना पर मजदूर न होना...कोरोना पर कविता-

कानपुर उत्तर प्रदेश से के. एम. भाई आज कोरोना महामारी के बारे में बताते हुये एक कविता सुना रहे हैं :
कोरोना का है कहना-
शराबी होना पर मजदूर न होना-
अमेरिका जाना पर भारत में न रहना-
खूब रोना पर कुछ न कहना-
भूखे रहना और बार बार हांथ धोना-
कोरोना का है कहना-
शराबी होना पर मजदूर न होना...

Posted on: May 12, 2020. Tags: CORONA POEM KM BHAI UP

अच्छा खा और अच्छा सोंच, त्याग दे शर्म संकोच...कोरोना पर कविता-

जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच-
कल तक चेहरा खुल्ला था-
आज पहना ले वस्त्र-
कोरोना से युद्ध करने का-
यही तो है एक शस्त्र-
एक दूजे से दूर रहो मार न दे कहीं चोंच-
अच्छा खा और अच्छा सोंच-
त्याग दे शर्म संकोच...

Posted on: Apr 20, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर...कोरोना पर कविता-

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व कोरोना पर एक कविता सुना रहे हैं:
जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर-
कोरोना, कोरोना-
बस यहाँ वहां कोहराम है-
पशु पक्षी तो आजाद विचरण कर रहे हैं-
किन्तु मनुष्य गुलाम है-
कोरोना के नाम पर आज कैसी सजा दे है-
आज हर कोई अपने घर में कैदी है...

Posted on: Apr 15, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

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