जंगल में एक वृक्ष खड़ा था, सब वृक्षों से बड़ा था...बाल कविता

ग्राम-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक बाल कविता सुना रहे हैं :
जंगल में एक वृक्ष खड़ा था, सब वृक्षों से बड़ा था-
लंबा चौड़ा छायादार, उसके नीचे था बाजार-
बंदर बेच रहा था आलू, उसको तोल रहा था भालू-
हिरण लिया सब्जी का ठेला, बेच रहा था हरा केला-
लौकी, कोहड़ा और पपीता लेकर आया बूढा चीता-
खरहा हरी मिर्च ले आये, बंदरिया को लगे उसे चखाए...

Posted on: Sep 23, 2018. Tags: CG CHILDREN KAILASH SINGH POYA POEM SURAJPUR

नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणो...गोंडी छट्टी गीत

ग्राम-टेकामेट्टा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सन्नी उसेंडी के साथ दुलोशा, डबसा और लहरों एक गोंडी छट्टी गीत सुना रहे हैं, इस गीत को जब बच्चे का जन्म होता है तब गाया जाता है:
री री लोयो री री लोयो री री ला री री लोयो री री ला-
नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणों-
चारो समधी बिसार हो नुनाले-चारो समधी बिसार हो...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHILDREN GONDI KANKER PAKHANJUR SONG SUNNY USENDI

विरल-विरल तुरी उमर चितोरी...गोंडी बाल गीत

ग्राम-पंचायत-बड़ेबेटिया, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से स्कूल की कक्षा 3 की छात्रा कुमारी लिलिमा उसेंडी एक गोंडी गीत सुना रही हैं:
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
तनी उम्र मार-मार चल चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
ओ बेंड बाजा-
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
तनी उम्र मार -मार चल चितोरी...

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHILDREN GANESH AYAM GONDI KANKER KOELIBEDA SONG

बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना...बाल कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं:
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर में आकर तुम बिल न बनाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम मेरे कपड़े को न कुतरना-
बड़ा महंगा पड़ता है फिर से उनको फिर सिलाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम कोठी के धान न खाना-
बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना-
बहार जो भी मिल्रे उसी को तुम खाना...

Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG CHILDREN KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

खटमल रानी खटमल रानी मेरे घर पर न आना...बाल कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं:
खटमल रानी खटमल रानी मेरे घर पर न आना-
मेरे घर पर आकर तुम मेरे बिस्तर में न चढ़ना-
मेरे खाट पर चढ़कर तुम घर न बनाना-
बड़ा आफत आती है तुम्हारा घुस कर काटना-
नींद नही आती है पड़ता है खुजलाना-
बच्चे मेरे रोते हैं करके खुजली का बहाना-
फोड़ा-फुंसी होता है तुम्हारा जो काटना-
डाक्टर घर जाना पड़ता है, पड़ता खजाना लुटाना...

Posted on: Sep 09, 2018. Tags: CG CHILDREN KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

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