कोरोना वायरस देश विदेश में,मचा दिया है हा हा कार....कोरोना गीत-

जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चन्द्रप्रकाश हमारे सीजीनेट सुनने वाले श्रोताओं को कोरोना वायरस से सम्बंधित एक गीत सुना रहे है:
कोरोना वायेरश देश विदेश में-
मचा दिया है हा हा कार-
बड़ा है लफड़ा करा है कचड़ा-
साबुन से हाथ धोना रे-
मुह में मास्क लगाओ रे-
बीस सकेंड तक हाथ धोना है-
घर पर ही रहना है...   CS

Posted on: Jul 06, 2020. Tags: BALRAMPUR CG CHANDRAPRAKASH HINDI SONG

बेटियां भगवान का सबसे बड़ा वरदान है...बेटियों पर कविता

दिल्ली से चन्द्रप्रकाश बेटियों पर एक कविता सुना रहे है :
मेहँदी बोली कुमकुम का त्यौहार नहीं होता-
रक्षाबंधन के चन्दन का प्यार नहीं होता-
इसका आँगन एक दम सूना-सूना सा रहता है-
जिसके घर में बेटी का अवतार नहीं होता-
जिस धरती पर से मात्र शक्ति का मान नहीं जा सकता है-
नर के नारी से सम्मान नहीं जा सकता है-
बेटा घर में हो तो बेशक सीना ठंडा रह जाये-
बेटी घर में हो तो भूखा मेहमान नहीं जा सकता...

Posted on: Apr 16, 2017. Tags: CHANDRAPRAKASH DELHI

माँ से बढ़कर कोई तस्वीर नहीं होती है...एक कविता

चंद्रप्रकाश यादव दिल्ली से माँ पर एक कविता सुना रहे हैं :
मेरा मानना है कि दास्ताँ से बड़ी कोई जंजीर नहीं होती है
जिगर से बढ़कर कोई तीर नहीं होती है
कोई रहेमान हो सुल्तान या भगवान कोई
माँ से बढ़कर कोई तस्वीर नहीं होती है
जब आँख खुली तो अम्मा की गोद का सहारा था
उसका नन्हा सा आंचल मुझे भूमंडल से प्यारा था
उसके चहरे की झलक देख चेहरा फूलों सा खिलता था
उसकी आंचल की एक बूँद से मुझे जीवन मिलता था
मैं उसका राजा बेटा था वो आँख का तारा कहती थी
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका एक सहारा कहती थी
उंगली को पकड़कर चलाया था पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानगी को भी बीच अंतर में सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो फ़ौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन वो खुद गुलाब बन जाती थी
उसने क्या-क्या बुरी नज़र से बचाने के लिए
माथे पर सदा काला टीका लगाया था
माँ जैसी देवी जो घर में नहीं रह सकती
वो लाख पुन्य भले कर ले
इंसान नहीं बन सकते
माँ जिसको भी जल दे-दे वो पौधा सुन्दर बन जाता है,
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगा जल बन जाता है,
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है
दुनिया में जितनी भी खुशबु है वो माँ के आँचल से आई है
माँ कबीरा की साखी जैसी माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली,खुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी,पावन बरगद की छाया है
माँ मानसरोवर की ममता माँ गोवर्धन की छाई है,
माँ परिवारों का संगम है माँ रिश्तों की गहराई है
माँ हरी दूब है धरती की,माँ केसर वाली क्यारी है
माँ की उपमा केवल माँ है,माँ हर घर की फुलवारी है
सातों स्वर नृत्य करते हैं जब कोई माँ लोरी गाती है
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाता है

Posted on: Aug 12, 2014. Tags: Chandraprakash Yadav